फोन बंद करने के बाद भी दिमाग स्क्रॉल क्यों करता रहता है?

फोन बंद करने के बाद भी दिमाग स्क्रॉल क्यों करता रहता है?

क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि मोबाइल बंद कर देने के बाद भी दिमाग रुकता नहीं? फोन साइड में रखा है, स्क्रीन ऑफ है, लेकिन दिमाग में वीडियो, बातें, काम, चिंता या पुरानी बातें अपने आप चलती रहती हैं। यह कोई कमजोरी नहीं है और न ही आप अकेले हैं। आज के समय में यह एक बहुत आम मानसिक स्थिति बन चुकी है।

असल में दिमाग और मोबाइल के रिश्ते को हम अक्सर गलत समझ लेते हैं। हमें लगता है कि फोन बंद करते ही दिमाग भी आराम मोड में चला जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होता। इसका कारण सिर्फ सोच नहीं, बल्कि दिमाग की आदतें हैं।

दिमाग “स्क्रॉल” क्या करता है?

जैसे हम फोन पर एक वीडियो से दूसरे वीडियो पर जाते हैं, वैसे ही दिमाग भी एक विचार से दूसरे विचार पर कूदता रहता है। फर्क बस इतना है कि फोन में उंगली चलती है और दिमाग में यादें, डर, प्लान और कल्पनाएं।

दिन भर फोन देखने से दिमाग को लगातार नए संकेत मिलते रहते हैं — नोटिफिकेशन, रील्स, मैसेज, खबरें। जब फोन अचानक बंद होता है, तो दिमाग उस गति को रोक नहीं पाता। वह उसी आदत के कारण अंदर ही अंदर स्क्रॉल करता रहता है।

इसके पीछे असली वजह क्या है?

इसका सबसे बड़ा कारण है डोपामिन की आदत। फोन इस्तेमाल करते समय दिमाग को बार-बार छोटा-छोटा आनंद मिलता है। यही आनंद दिमाग को एक्टिव रखता है। जब फोन हट जाता है, तो दिमाग उस फीलिंग को खुद पैदा करने लगता है।

दूसरी वजह है मानसिक ओवरलोड। हम दिन भर इतनी ज्यादा जानकारी लेते हैं कि दिमाग को उसे पचाने का समय ही नहीं मिलता। रात को या शांत समय में वही सारी बातें बाहर आने लगती हैं।

क्या यह ओवरथिंकिंग है?

हर बार नहीं। ओवरथिंकिंग तब होती है जब दिमाग किसी एक बात में फंस जाता है। यहां दिमाग लगातार बदलती चीजों के बारे में सोचता रहता है। यह एक तरह का मेंटल स्क्रॉल मोड है, जो आदत से बनता है।

फोन बंद करने से दिमाग क्यों नहीं रुकता?

क्योंकि दिमाग को यह सिखाया ही नहीं गया कि कैसे रुकना है। हम दिन में एक पल भी उसे शांत नहीं रहने देते। जैसे शरीर को आराम की ट्रेनिंग चाहिए, वैसे ही दिमाग को भी चाहिए।

फोन बंद करना पहला कदम है, लेकिन आखिरी नहीं। दिमाग को धीरे-धीरे यह समझाना पड़ता है कि अब उसे कुछ नहीं करना है।

इस स्थिति को धीरे-धीरे कैसे ठीक करें?

1. फोन बंद करने के बाद तुरंत लेट न जाएं। 2–3 मिनट बस बैठें, गहरी सांस लें। इससे दिमाग को ट्रांजिशन मिलता है।

2. सोने से पहले दिन का “मेंटल क्लोजर” करें। जो भी काम या बात दिमाग में घूम रही है, उसे मन में पूरा मान लें।

3. एक ही समय पर फोन छोड़ने की आदत बनाएं। रोज़ अलग-अलग समय फोन छोड़ने से दिमाग भ्रमित रहता है।

4. बिल्कुल सन्नाटा न बनाएं। हल्की हवा की आवाज़, पंखे की आवाज़ या धीमा म्यूजिक दिमाग को एंकर देता है।

5. खुद से लड़ने की कोशिश न करें। “सोचना बंद करो” कहने से दिमाग और तेज चलता है। उसे बहने दें, वो खुद थक कर रुकेगा।

एक जरूरी बात समझ लो

दिमाग का स्क्रॉल करना कोई बीमारी नहीं है। यह बस इस बात का संकेत है कि आपने उसे दिन भर बहुत ज़्यादा इनपुट दिया है। सही आदतों से यह धीरे-धीरे शांत होना सीख जाता है।

फोन बंद करना अच्छी बात है, लेकिन दिमाग को बंद करने की कोशिश करना गलत है। उसे आराम देना सीखिए, कंट्रोल नहीं।


Phone is off, but the mind keeps scrolling — save this poster to understand why.

Team vhoriginal.com | Lifestyle Expert

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Vivek Hardaha

Vivek Hardaha

M.Sc. CS • M.A. Sociology • PGD Rural Dev.
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