ज्यादा सोचने की आदत | ओवर थिंकिंग से नुकसान | Ways How To Stop Overthinking In Hindi
क्या आपको पता है ज्यादा सोचना या ओवर थिंकिंग कैसे आपका समय, पैसा और जिंदगी सब कुछ बर्बाद कर सकता है। जी हां दोस्तों ज्यादा सोचने के इतने नुकसान हैं कि आप सोच भी नहीं सकते और ज्यादा सोचने की आदत की बारे में ज्यादा सोचने वाले को भी पता नहीं होता कि उसे ज्यादा सोचने की आदत लग चुकी है।
दोस्तों आप इस आर्टिकल को पढ़ रहे हैं तो इसका मतलब आप ज्यादा सोचने की आदत के बारे में भी बहुत ज्यादा सोच रहे हैं, तो चलिए बात करते हैं कि क्या है ज्यादा सोचना? और कैसे ये हमारे जीवन में प्रभाव छोड़ता है और किस तरह हमारी जिंदगी बर्बाद करता है। हम आगे जानेंगे ज्यादा सोचने के लक्षण, ज्यादा सोचने के नुकसान और इसे छोड़ने की कुछ तरीकों के बारे में।
● क्या है ज्यादा सोचने की आदत?
जब कोई व्यक्ति किसी घटना, वस्तु, व्यक्ति, बीमारी या भावनाओं के बारे अत्यधिक विचार करता है इतना कि 5 मिनिट के लिए भी वो उस विचार को भूल नही पाता, और लाख समझाने पर कि ‘कुछ नहीं होगा’ ‘भूल जाओ’ वो भूल नही पाता तब हम कह सकते हैं कि उस व्यक्ति को ज्यादा सोचने की आदत है। वैसे ज्यादा सोचने की आदत व्यक्ति की उम्र और समय के हिसाब से कम ज्यादा हो सकती है।
● क्या ज्यादा सोचने की आदत अच्छी होती है?
बिल्कुल हाँ! आपको क्या लगता है इस दुनिया में जितने भी जीनीयस हुए हैं क्या वो कम सोचते थे? नहीं दोस्तों वो बाकी लोगों के मुकाबले कहीं ज्यादा सोचते थे। लेकिन आपके साथ जो ज्यादा सोचने की समस्या है, वो है आपके नकारात्मक विचार! आप नकारात्मक ज्यादा सोचते हैं यदि आप सकारात्मक बातें ज्यादा सोचेंगे तो ये आपके लिए किसी भी तरह से नुकसानदायक नहीं है इसीलिए हम कह सकते हैं कि ज्यादा सोचना सही है और नहीं भी।
● कैसे जाने कि आपको ज्यादा सोचने की आदत लग चुकी है
नीचे दिए गए सवालों के जवाब दें:-
1. जब कभी आप डॉक्टर के पास अपना चेकअप कराने जाते हैं तो क्या आपको ऐसा लगता है कि डॉक्टर ने आपको सही तरीके से देखा नहीं?
2. क्या आप मन में अपने आप से ही बातें करते रहते हैं?
3. क्या आपके मन में सबसे पहले नकारात्मक ख्याल आते हैं जैसे कि घर छोड़कर जाने पर चोरी का डर, कुछ खाने पर बीमारी का डर, हल्का सा दर्द होने पर बड़ी बीमारी का डर?
4. क्या रात में नींद खुलने पर बार-बार एक ही विचार आपको तंग करता है?
5. क्या कभी आप से किसी ने या आपके डॉक्टर ने ये कहा कि आप ज्यादा सोच रहे हैं?
दोस्तों यदि ऊपर दिए गए 5 प्रश्नों में से यदि आप ने 3 प्रश्नों के उत्तर “हाँ” में दिए हैं, तो आपको ज्यादा सोचने की आदत लग चुकी है।
● ज्यादा सोचने या ओवर थिंकिंग के लक्षण
जो व्यक्ति ज्यादा सोचने या ओवरथिंकिंग के शिकार होते हैं ज्यादातर उनमें नीचे दिए गए मानसिक और शारीरिक लक्षण पाए जाते हैं-
1. घबराहट
2. बेचैनी
3. चिंता
4. दिल की धड़कनों का बढ़ना
5. किसी काम में मन ना लगना
6. वजन कम होना (कमजोरी)
7. एक ही विचार बार-बार आना
8. नींद ना आना
9. एकाग्र ना हो पाना
10. सिर में दर्द
(नोट: ऊपर दिए गए लक्षण किसी अन्य बीमारी के भी हो सकते हैं)
जरूर पढ़ें: चिंता और तनाव कैसे दूर करे
● ज्यादा सोचने ओवर थिंकिंग के नुकसान-
ज्यादातर समय में हम ओवरथिंकिंग से होने वाले नुकसान को समझ ही नहीं पाते हैं हमें लगता है कि यह हमारी ही गलती है, जबकि वह नुकसान हमें हमारी ज्यादा सोचने की आदत के कारण होता है। ज्यादातर ज्यादा सोचने वाले लोगों को नीचे गए नीचे दिए गए नुकसान ओं का सामना करना पड़ता है।
1. चाहे माहौल कितनी भी बड़ी खुशी का क्यों ना हो ज्यादा सोचने वाला व्यक्ति खुश नहीं हो पाता।
2. ऐसे व्यक्ति के चेहरे की सारी रौनक गायब हो जाती है।
3. ऐसा व्यक्ति खाना भी ठीक से नहीं खा पाता और उसके शरीर में कमजोरी आने लगती है।
4. ज्यादा सोचने वाले व्यक्ति सामाजिक कार्यक्रमों में जाने से घबराने लगते हैं।
5. जो व्यक्ति ज्यादा सोचता है उसे अकेले रहना पसंद होता है वह समाज से धीरे-धीरे दूर होने लगता है।
6. ऐसे व्यक्ति में मन में नकारात्मक का भर जाती है और व्यक्ति किसी भी काम को करने से पहले उससे होने वाले नुकसान और घाटे के बारे में ज्यादा सोचता है।
7. ज्यादा सोचने वाला व्यक्ति कभी भी किसी बात से संतुष्ट नहीं होता।
8. ऐसे व्यक्ति को रात में नींद नहीं आती और ये रात भर सोचते रहते हैं।
9. ज्यादा सोचने वाले व्यक्ति नशे के शिकार भी आसानी से हो जाते हैं जो कि इसका सबसे बड़ा नुकसान है।
10. सोचने वाला व्यक्ति किसी काम के बारे में सिर्फ सोचता है और करने वाले व्यक्ति उसे कर देता है इसीलिए ज्यादा सोचने वालों के साथ हमेशा गलत होता है और उन्हें असफलता ही हाथ लगती है। क्योंकि ऐसे लोग किसी काम के बारे में ज्यादा सोचकर उस काम को खुद ही बिगाड़ लेते हैं।
● किन चीजों के बारे में व्यक्ति ज्यादा सोचता है
देखा जाए तो आजकल लोग जरा-जरा सी बात में भी ज्यादा सोचने लगे हैं ऐसे में यह तय कर पाना मुश्किल होता है कि कोई व्यक्ति किस चीज के बारे में ज्यादा सोच रहा है। लेकिन कुछ अध्ययनों से पता चला है कि व्यक्ति किन बातों के बारे में ज्यादा सोचते हैं। आगे हम पढेंगे वो प्रमुख बातें जिनके बारे में व्यक्ति ज्यादा सोचते हैं एक बात में गौर कीजिएगा दोस्तों हम यहां पर ओवरथिंकिंग यानी कि बहुत ज्यादा सोचने वाले लोगों के बारे में बात कर रहे हैं।
1. बीमारी के बारे में ज्यादा सोचना:
बीमारियों के बारे में ओवर थिंकिंग करने वाले लोग हर समय अपने शरीर में आने वाले बदलाव और लक्षणों पर गौर करते रहते हैं, ऐसे लोगों को ध्यान बार-बार अपने दिल की धड़कनों, तापमान, सूजन, मोटापा, ब्लडप्रेशर पर जाता है। डॉक्टर को दिखाने पर कुछ नहीं निकलता लाख समझाने पर भी ये लोग मानते नहीं और अपने शरीर में बीमारियों के लक्षण खोजते रहते हैं।
जरूर पढ़ें: मन की बकबक को कैसे रोकें ?
2. रिश्तों के बारे में ज्यादा सोचना:
रिश्तो के बारे में ज्यादा सोचने वाले इंसान को हमेशा अपने परिवार अपने रिश्तेदारों की चिंता सताती रहती है, ऐसे लोग सोचते हैं कि कहीं कोई उन्हें धोखा ना दे दे, कहीं उनके परिजनों के साथ कोई हादसा ना हो जाए, और इसी चिंता में वे दिन रात डूबे रहते हैं जरा सी देर हो जाने मैं उनके मन में तरह-तरह के विचार आने लगते हैं ये सब होता है उनकी ज्यादा सोचने की आदत के कारण।
3. पैसों की बारे में ज्यादा सोचना:
आज के समय में तो पैसों की बारे में ज्यादा सोचना कोई बुरी बात नहीं लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो पर्याप्त पैसा होने के बाद भी पैसे के बारे में ही चिंता करते रहते हैं। ऐसे लोगों के पास इतना पैसा होता है कि वो अपनी जिंदगी अच्छे से काट सकते हैं लेकिन फिर भी उन्हें पैसों की चिंता सताती है। जिस व्यक्ति के पास कुछ नहीं कहने का मतलब जिसके पास पैसे नहीं तब तो उसका पैसों के बारे में सोचना बनता है लेकिन यदि वो भी “पैसे कमाने” के बजाय पैसे कमाने के बारे में “सोचता” रहेगा तो ये उसकी ओवरथिंकिंग है।
जरूर पढ़ें:- कम पैसो मे बिजनेस कैसे शुरू करें?
4. मृत्यु के बारे में ज्यादा सोचना:
मरने का डर ज्यादा उम्र के व्यक्तियों के साथ होता है थोड़ी सी कुछ बीमारी हो जाने पर या शारीरिक लक्षणों को देखते हुए ऐसे लोग अपनी मृत्यु का अंदाजा लगाने लगते हैं, कभी-कभी किसी और की मृत्यु को देख कर भी इन्हें अपनी मृत्यु के बारे में ख्याल आता है और ये सोचते रहते हैं कि मैं मरूंगा तो क्या होगा।
● ज्यादा सोचने ओवर थिंकिंग से कैसे बचें
दोस्तों ज्यादा सोचना या ओवरथिंकिंग एक गंभीर समस्या है क्योंकि यह व्यक्तियों को सिर्फ सोचने के लिए मजबूर करती है ऐसा व्यक्ति सिर्फ सोचते रह जाता है और काम कुछ नहीं कर पाता इसीलिए इस बीमारी से जल्द से जल्द छुटकारा पा लेना ही अच्छा होता है।
कारण को पहचाने- यह काम सिर्फ आप ही कर सकते हैं आप ही समझ सकते हैं कि ऐसा कौन सा कारण है जो आपको ज्यादा सोचने में मजबूर कर रहा है चाहे वह बीमारी हो, परिवार हो, पैसा हो या अन्य किसी तरह का डर ऐसा क्या है जिसके कारण आप ज्यादा सोच रहे हैं सबसे पहले कारण को पहचानें।
1. सोच को नियंत्रित करें-
दोस्तों जब आप जान जाएं कि आप किस बात को ज्यादा सोच रहे हैं या कौन सी बात आपको तंग कर रही है तो उस बारे में अपनी सोच को नियंत्रित करें अपने आप को समझाएं कि आप इस विषय को लेकर ज्यादा सोच रहे हैं। नियंत्रित करने से मेरा मतलब है किसी विषय के बारे में उतना ही सोचें जितना जरूरी हो यदि आप बीमारियों के बारे में ज्यादा सोच रहे हैं तो लक्षणों को पहचान कर डॉक्टर से बात करें और डॉक्टर जो भी कहता है उसकी बातों में यकीन करें, खुद से डॉक्टर बनने की कोशिश बिल्कुल भी ना करें। यदि आप मृत्यु के बारे में ज्यादा सोचते हैं या दूसरों की मृत्यु को देख कर आपको लगता है कि कहीं आप भी ना मर जाए, तो अपने मन को यह समझाइये कि अभी जिस व्यक्ति की मृत्यु हुई है वो आप नहीं है आप अभी भी इस दुनिया में जिंदा खड़े हैं और आपका फर्ज बनता है कि आप उस व्यक्ति की व्यक्ति के परिवार की मदद करें ना कि ये सोचें कि आप मरेंगे तो क्या होगा। अपनी सोच को नियंत्रित करें।
2. योग, ध्यान और व्यायाम-
योग ध्यान और व्यायाम को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं मानसिक परेशानियों में ध्यान, योग और व्यायाम बहुत ही काम आते हैं ऐसा आपने पहले भी सुना होगा और इस बारे में आपको बहुत से आर्टिकल इंटरनेट पर मिल जाएंगे सुबह की सैर में जाएं, कोई जिम ज्वाइन करें, और 15 से 20 मिनट ध्यान लगाने की कोशिश करें। ये आपको अपने मन पर नियंत्रण करने में बहुत मदद करेंगे।
3. बाल्टी को समय पर हटा ले-
ओवरथिंकिंग कि तुलना हम उस भरी हुई बाल्टी से कर सकते हैं जिसके भर जाने के बाद भी नल चालू है बाल्टी में जितना पानी आना था वो तो आ चुका है लेकिन फिर भी हम उस बाल्टी में पानी भरे जा रहे हैं जो कि हमारे बिल्कुल भी काम का नहीं, इसीलिए समय रहते ही बाल्टी के भर जाने के बाद बाल्टी को हटालें। कहने का मतलब उतना ही सोचें जितना जरूरी है।
3. विशेषज्ञ की सलाह लें-
बहुत से प्रयास करने के बाद भी यदि आप अपने अपनी सोच पर नियंत्रण नहीं पा रहे हैं तो आप किसी विशेषज्ञ की सलाह ले सकते हैं जो कि आपको सही सलाह देकर आपकी सोच को नियंत्रण करने में आपकी मदद कर सकता है।
● क्या मैं ज्यादा सोचने की आदत को काम कर सकता हूं?
जी हाँ बिल्कुल कर सकते हैं!! कब से? बस अभी से….
जरूर पढ़ें: कम पैसो मे बिजनेस कैसे शुरू करें?
जरूर पढ़ें: चिंता और तनाव कैसे दूर करे
जरूर पढ़ें: मन की बकबक को कैसे रोकें ?



