होली फाग गीत लिरिक्स: टॉप 3 महिला फाग गीत (ढोलक ताल के साथ)

होली फाग गीत लिरिक्स: टॉप 3 महिला फाग गीत (ढोलक ताल के साथ)

होली फाग गीत लिरिक्स: टॉप 3 महिला फाग गीत (ढोलक ताल के साथ)

फाल्गुन का महीना शुरू होते ही घरों के आंगनों और मोहल्ले की चौपालों पर महिलाओं की टोलियां जुटने लगती हैं। होली का त्योहार महिलाओं के ढोलक और मीठे फाग गीतों के बिना बिल्कुल सूना लगता है। दोपहर के समय जब औरतें अपना घर का काम खत्म करके एक साथ बैठती हैं, तो ढोलक की ताल पर गाए जाने वाले वे देहाती और पारंपरिक गीत पूरे माहौल में रंग भर देते हैं।

अक्सर देखा जाता है कि जब महिलाएं ढोलक लेकर बैठती हैं, तो उन्हें पुराने और पारंपरिक होली गीतों की शुरुआती लाइनें तो याद रहती हैं, लेकिन आगे के पूरे बोल (Lyrics) याद नहीं आते। आपकी इसी उलझन को दूर करने के लिए, हम इंटरनेट पर सबसे ज्यादा खोजे जाने वाले टॉप 3 'महिला फाग गीतों' का पूरा लिखित संग्रह लेकर आए हैं। इन गीतों को आप आसानी से अपनी डायरी में लिख सकती हैं और ढोलक की ताल पर गा सकती हैं।

महिलाओं के होली गीतों का लोक-महत्व

महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले फाग गीतों में देवर-भाभी की मीठी तकरार, ननद-भौजाई के ताने-बाने और राधा-कृष्ण के प्रेम का बहुत ही सुंदर वर्णन होता है। ये गीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि ये सदियों से हमारी लोक-संस्कृति को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं। इन गीतों के माध्यम से आपसी गिले-शिकवे मिटाए जाते हैं।

त्योहार की इस पवित्रता को बनाए रखने के लिए यह बहुत जरूरी है कि हम सही परंपराओं का पालन करें। अगर आप होली के दिन की शुरुआत सही तरीके से करना चाहती हैं, तो यह जानना बहुत जरूरी है कि होली में क्या करना चाहिए और पूजा की सही विधि क्या है।

1. ढोलक पर सबसे ज्यादा गाया जाने वाला फाग: "फागुन में उड़े रे गुलाल"

जब भी महिलाएं ढोलक लेकर बैठती हैं, तो सबसे पहले इसी गीत से शुरुआत होती है। यह गीत गाने में बहुत ही आसान है और इसकी ताल सीधे ढोलक की थाप पर बैठती है। इसमें एक महिला अपनी सखियों और मनिहारन (चूड़ी वाली) से फाल्गुन के उल्लास का वर्णन कर रही है। इस सदाबहार फाग गीत के पूरे लिरिक्स यहाँ दिए गए हैं:

फागुन में उड़े रे गुलाल, कहियो रे मनिहारन से।
कहियो रे मनिहारन से, कहियो रे मनिहारन से॥
फागुन में उड़े रे गुलाल, कहियो रे मनिहारन से...

मेरा उड़-उड़ जाए रुमाल, कहियो रे मनिहारन से।
फागुन में उड़े रे गुलाल, कहियो रे मनिहारन से...

कोरी-कोरी मटकी में रंग जो घोरयो,
रंग जो घोरयो, सखी रंग जो घोरयो।
मोरे भीग गए रेशमी बाल, कहियो रे मनिहारन से...
फागुन में उड़े रे गुलाल...

सासु जी मेरी रंग नहीं खेले,
रंग नहीं खेले, सखी रंग नहीं खेले।
ससुर जी मचावे बवाल, कहियो रे मनिहारन से...
फागुन में उड़े रे गुलाल...

देवर मेरा रंग को रसिया,
रंग को रसिया, सखी रंग को रसिया।
मोरे मल दियो गोरे गाल, कहियो रे मनिहारन से...
फागुन में उड़े रे गुलाल...

इस गीत के हर अंतरे के बाद जब समूह की सभी महिलाएं एक साथ 'कहियो रे मनिहारन से' गाती हैं, तो एक अलग ही ऊर्जा पैदा होती है। अक्सर होली खेलते समय महिलाएं घर के कामों और रंग-गुलाल में इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि खुद का ध्यान नहीं रख पातीं। केमिकल वाले रंगों से बाल और त्वचा खराब होने का डर रहता है। इसलिए ढोलक की महफिल और रंग खेलने से पहले ही जान लें कि त्वचा और बालों से होली का रंग कैसे साफ करें, ताकि आपका चेहरा सुरक्षित और खिला-खिला रहे।

2. देवर-भाभी की हंसी-ठिठोली का गीत: "देवर ने मारी पिचकारी"

होली के त्योहार में देवर और भाभी के बीच रंग खेलने और हंसी-मजाक की परंपरा बहुत पुरानी है। जब महिलाएं ढोलक लेकर बैठती हैं, तो देवर-भाभी की छेड़छाड़ वाले फाग गीत महफिल में चार चांद लगा देते हैं। यह गीत गाने में बहुत ही तेज और मजेदार है। ताल के साथ जब औरतें ताली बजाकर इसे गाती हैं, तो सुनने वालों का भी मन झूम उठता है। इस मशहूर फाग गीत के लिखित बोल यहाँ हैं:

देवर ने मारी पिचकारी, मोरी भीग गई रेशम साड़ी।
भीग गई रेशम साड़ी, मोरी भीग गई रेशम साड़ी॥
देवर ने मारी पिचकारी...

सास गई मेले, ससुर गए मेले,
घर में रह गई मैं अकेली।
घर में रह गई मैं अकेली, घर में रह गई मैं अकेली॥
सुनसान महल अटारी, मोरी भीग गई रेशम साड़ी...
देवर ने मारी पिचकारी...

जेठ गए परदेस कमाने,
जिठानी गई है नैहरवा।
जिठानी गई है नैहरवा, जिठानी गई है नैहरवा॥
देवरिया खेलत होरी भारी, मोरी भीग गई रेशम साड़ी...
देवर ने मारी पिचकारी...

लाल गुलाबी रंग उड़ावे,
मोरे गोरे गालन पे।
मोरे गोरे गालन पे, मोरे गोरे गालन पे॥
रंग डारत बारम्बारी, मोरी भीग गई रेशम साड़ी...
देवर ने मारी पिचकारी...

देवर-भाभी का यह पवित्र और चंचल रिश्ता होली के दिन और भी गहरा हो जाता है। ढोलक की धुन और फाग के गीतों के बीच हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि त्योहार का असली मकसद मन के मैल को धोना है। साल भर की खटास और मनमुटाव को दूर करने के लिए, आपको यह जरूर सोचना चाहिए कि होली में अपनी बुराइयों को कैसे जलाएं, ताकि रिश्तों में फिर से वही मिठास और प्यार लौट आए।

3. राधा-कृष्ण की होली का फाग: "जमुना तट श्याम खेलत होरी"

महिलाओं की ढोलक की महफिल भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के गीतों के बिना कभी पूरी नहीं होती। इस फाग गीत में यमुना किनारे गोपियों और कान्हा के बीच होने वाली रंगों की बौछार का बहुत ही मनमोहक वर्णन किया गया है। जब महिलाएं इसे तेज आवाज में ढोलक और मंजीरे के साथ गाती हैं, तो पूरा घर गोकुल जैसा लगने लगता है। इसके आसान और खूबसूरत बोल यहाँ दिए गए हैं:

जमुना तट श्याम खेलत होरी,
सखियन संग राधा गोरी॥
जमुना तट श्याम खेलत होरी...

भर-भर मारत रंग पिचकारी,
लाल गुलाल से भर दी झोरी।
जमुना तट श्याम खेलत होरी...

ग्वाल बाल सब सखा बुलाए,
मचा रहे हैं शोर भारी।
जमुना तट श्याम खेलत होरी...

आज न छोड़ेंगे हे नंदलाला,
रंगेंगे तुमको बारी-बारी।
जमुना तट श्याम खेलत होरी...

ब्रज की नारियां मंगल गावें,
उड़त गुलाल लाल भई कोरी।
जमुना तट श्याम खेलत होरी...

भगवान की भक्ति में डूबे ये फाग गीत हमें बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देते हैं। जब हम अपने आंगन में बैठकर ढोलक की थाप पर भगवान के गीत गाते हैं, तो होलिका और प्रह्लाद की कथा भी जीवंत हो उठती है। इस पवित्र माहौल में अपने बच्चों को होली में भक्त प्रह्लाद की इन 5 बातों के बारे में जरूर बताएं, ताकि आने वाली पीढ़ी धर्म और सत्य के महत्व को समझ सके।

निष्कर्ष

ये थे ढोलक की थाप पर महिलाओं द्वारा सबसे ज्यादा गाए जाने वाले टॉप 3 फाग गीत। हमारी देहाती परंपराओं और लोकगीतों में जो मिठास और अपनापन है, वह किसी और चीज में नहीं। आधुनिकता के इस दौर में इन गीतों को संजोकर रखना हम सब की जिम्मेदारी है। इस होली पर अपनी डायरी में इन गीतों को नोट करें और अपनी सखियों के साथ जमकर फाग गाएं।

होली केवल आस-पड़ोस में रंग खेलने का ही नहीं, बल्कि दूर बैठे रिश्तेदारों और दोस्तों को भी याद करने का त्योहार है। जो लोग आपसे दूर हैं और आपकी होली की महफिल में शामिल नहीं हो सकते, उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से प्यार भेजें। आप उन्हें भेजने के लिए बेहतरीन होली मोबाइल वॉलपेपर और स्टेटस यहां से ले सकते हैं और डिजिटल तरीके से उनकी होली को भी रंगीन बना सकते हैं।

नोट: ऊपर दिए गए महिला फाग गीत पारंपरिक लोकगीत हैं और इन्हें इंटरनेट के विभिन्न स्रोतों से कलेक्ट किया गया है।

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Vivek Hardaha

Vivek Hardaha

M.Sc. CS • M.A. Sociology • PGD Rural Dev.
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