जीवन में मां का महत्व | हमारे जीवन में माँ का महत्व क्या है | Importance of Mother in our life in Hindi

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मनुष्य जीवन में माँ का महत्व | Importance of Mother in our life in Hindi

माँ...... रिश्तो और संबंधो में सबसे छोटा शब्द, पर देखा जाए तो ये एक शब्द है जिसमें पूरा संसार है। एक अनमोल शब्द, इंसान को दुनिया के हर रिश्ते का मूल्य चुकाना पड़ता है बस माँ और पिता ही ऐसे रिश्ते ही जिसका मूल्य कभी नहीं चुकाना पड़ता।  

माँ अनमोल क्यूँ ना हो, उसने हमें जन्म दिया, इस दुनिया में हम उसकी वजह से ही आए, इस दुनिया में आने के पहले भी उसने ही हमें सम्हाला अपनी कोख में। 9 महिने!! कोई कम नहीं होता है। 9 महिने हम माँ के साथ ही थे एक दम उसके करीब, वो जहाँ जाती हम वहीं जाते हैं, वो जो खाती वही हम खाते हैं, वो जो सुनती वही हम सुनते हैं। हम माँ के हर अहसास को समझ पाते हैं जब शायद हममें समझने की ही सुध ही नहीं ही नहीं थी।

जीवन में मां का महत्व | हमारे जीवन में माँ का महत्व क्या है | Importance of Mother in our life in Hindi
जीवन में मां का महत्व

लेकिन अब हम बड़े हो गए हैं तो क्या अब माँ को समझना इतना मुश्किल है कि हम उसकी छोटी सी बात पर चिड़चिड़ाते हैं! 🤔

हमारे जीवन में माँ का महत्व क्या है

माँ को शब्दो में समझाना या उसके बारे में लिखना मुश्किल है। माँ की भावना को वही समझ सकती है जो खुद एक माँ हो या वो इंसान जिसका दिल बहुत बड़ा हो। माँ का दिल बहुत बड़ा होता है, उसमें बहुत प्यार होता है अपने बच्चों के लिए. फिर चाहे उनका एक बच्चा हो या बहुत सारे। सारे बच्चों के लिए बारबर प्यार। वो अपने बच्चों को प्यार बाटने में कभी एक प्रतिशत भी कम ज्यादा नहीं करती। सारे बच्चो में बारबर प्यार बांटती है।

एक औरत जैसे ही गर्भवती होती है उसकी सारी भावना एक माँ में ही बदल जाती है, निभाती तो वो सारे रिश्ते है बेटी, पत्नी, बहू, सभी रिश्ते निभाती हैं पर उन सब में सबसे ऊपर होता है उसका माँ होना। जहाँ वो सोचती थी पहले ख़ुद के लिए अब सोचती है अपने बच्चे के लिए।

एक औरत के लिए वो दिन सबसे खूबसूरत होता है जब वो एक बच्चे को जन्म देती है। बच्चे के जन्म होने के बाद उसकी दुनिया ही वही हो जाती है। बच्चे को खिलाना, सुलाना, प्यार दुलार करना, अच्छी परवरिश देना, पढ़ना सिखाना। माँ चाहे पढ़ी लिखी हो या अनपढ़ हो पर अपने बच्चों को सबसे अच्छी सलाह और शिक्षा वही देती है। इसीलिए तो मांमाँ पहला शिक्षक बोला जाता है।

जीवन में माँ का महत्व

मां बनने के बाद औरत पूरी तरह बदल जाती है, अगर आप एक माँ हैं तो आप इसे अच्छे से समझ सकती हैं। जहाँ कि औरत खुद के लिए दसरो से लड़ती थी या तो बहुत ही सीधी हो किसी से न ही कभी लड़ती हो पर जैसे ही उसके बच्चे की बात आती है वो पूरी दुनिया से लड़ जाती है, तब वो नहीं देखती कि सामने कौन है। जहाँ वो पहले ख़ुद के पसंद का भोजन पसंद करती थी अब वो बच्चे के पसंद का खाना बनाना पसंद करती है। अब उसे साड़ी, सलवार सूट, गहने नहीं पसंद आते अब उसे बच्चे के कपड़े, खिलौने ही दिखते हैं।

बहुत खुशनसीब होते है वो बच्चे जिनकी माँ होती है और वहीं बहुत खुशनसीब होती है वो माँ जिस के बच्चे उसे समझते हैं।

पर क्या बच्चे समझ पाते हैं माँ को!!! शायद ही समझ पाते हैं , नहीं तो कभी व्रद्धआश्रम खुला ही ना होता, या कभी बच्चे एक ही जगह में दूसरे घर में ना रहते। क्यूँ बच्चों को मुश्किल हो जाता है माँ को सम्हालना, क्यूँ नहीं अच्छी लगती अब माँ की बातें।

माँ ने हमें हर समय अपने साथ रखा है जब हममें दिमाग ही नहीं था, हम जब खुद की गंदगी ही साफ नहीं कर पाते थे, हम खुद से खा भी नहीं पाते थे  और ना ही हम नहा पाते थे। माँ के इतने कर्ज होते है बच्चे के ऊपर कि वो शायद ही कभी चुका पाये. फिर भी माँ कभी भी नहीं मांगती है कुछ। कभी नहीं बोलती कि मैंने तुझे खाना खिलाया चल आज तू ही खिला दे।

जीवन में मां का महत्व | हमारे जीवन में माँ का महत्व क्या है | Importance of Mother in our life in Hindi
 Importance of Mother in our life in Hindi 

अगर वो नहीं मांगती तो क्या हम उसकी खुशी के लिए कुछ अच्छा नहीं सोच सकते। माँ के कर्ज को तो हम कभी नहीं चुका का सकते पर उसे खुश ही रखेंगे, अपने आँखों के सामने रखेंगे अपने साथ रखें तो बस इतने में ही वो खुश हो जाएगी। और ऐसा नहीं है अब जब हम बड़े हो गए ही सक्षम हो गए और ये सब माँ के लिए कुछ अच्छा कर रहे हैं तो हम उसका थोड़ा बहुत कर्ज अदा कर रहे हैं। नहीं ऐसा नहीं है क्यूकी इसके बदले भी वो तुमको इतना आशीर्वाद देगी की तुम फिर कर्जदार हो जाओगे

माँ के साथ रहने वाला इंसान कभी गरीब नहीं होता है। अगर तुम जिंदगी भर माँ के साथ रहते हो तो तुम आज नहीं तो कल जरूर समझ पाओगे कि तुम कितने अमीर हो।

माँ के बारे में लिखने बैठें तो हम जिंदगी भर पढ़ ही नहीं पाएंगे पर आज मैंने कुछ हिस्सा लिखा है जितना मैं सोच पाती हूँ। लिखना तो बहुत कुछ चाहती हूँ पर एक साथ बहुत सारा नहीं लिख सकती। बस आखिरी में एक लाइन बोलूंगी अपनी मां के लिए

 "मांग लू ये मन्नत की फिर यही जहाँ मिले, 

फिर यही गोद मिले फिर यही माँ मिले"

"मातृ दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाएँ"

: सुरभि हरदहा 


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