ताड़का कौन थी और रामायण में ताड़का के साथ क्या हुआ था | Ramayan me Tadka kon thi

रामायण में ताड़का कौन थी | Ramayan me Tadka kon thi

आज हम इस पोस्ट में जानेंगे कि ताड़का कौन थी और ताड़का का रामायण में क्या योगदान था। और ताड़का ने राम के साथ क्या किया था।

रामायण में ताड़का कौन थी | Ramayan me Tadka kon thi
Ramayan me Tadka kon thi

ताड़का वाल्मीकि रामायण के कई ऐतिहासिक पात्रों में से एक हैं। ताड़का सुकेतु यक्ष की पुत्री थी, जो एक श्राप के प्रभाव से राक्षसी बन गई थी। उसका विवाह सुंद नाम के दैत्य से हुआ था। ताड़का के दो पुत्र थे, उनके नाम थे सुबाहु और मारीच। ताड़का का परिवार अयोध्या के नजदीक एक जंगल में रहता था। ताड़का का परिवार पूरी तरह से राक्षसी प्रवृत्तियों में लिप्त रहता था। वह देवी-देवताओं के लिए यज्ञ करने वाले ऋषि-मुनियों को तंग किया करते थे। सभी ऋषि मुनि ताड़का और उसके दोनों पुत्रों से परेशान थे।

जब उन्होंने यह बात ऋषि विश्वामित्र को बताई तो विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को लेकर यज्ञ भूमि पहुंचे। अयोध्या के दोनों राजकुमारों ने ताड़का के परिवार का अंत कर दिया। लेकिन मारीच को बिना फन का बाण मारकर कोसों दूर फेक दिया।

वह राम से प्रतिशोध लेना चाहता था क्योंकि उसकी मां ताड़का और भाई को श्रीराम ने मार दिया था। सीता-हरण के दौरान रावण ने मारीच की मायावी बुद्धि की सहायता ली थी। मारीच सीता हरण के दौरान सोने का हिरण बना था। जिसे देखकर ही उसका शिकार करने के लिए उधर भगवान श्रीराम उसके पीछे गए और इधर रावण ने सीता का हरण कर लिया था। सुकेतु नाम का एक यक्ष था। उसकी कोई भी संतान नहीं थी। इसलिए उसने संतान प्राप्ति की इच्छा से ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या की। 

ब्रह्मा जी प्रसन्न हुए और उन्होंने संतान प्राप्ति का वरदान दिया। कुछ समय बाद सुकेतु यज्ञ के यहां ताड़का का जन्म हुआ। वरदान स्वरूप ताड़का के शरीर में हजार हाथियों का बल था। तब सुकेतु यक्ष ने उसका विवाह सुंद नाम के दैत्य से किया। लेकिन ताड़का (ताड़का का एक अन्य नाम 'सुकेतुसुता' भी था।) दैत्यों की तरह व्यवहार करने लगी तब अगस्त्य ऋषि के श्राप से वह भी राक्षसी हो गयी थी।

जब ये बात सुंद को पता चली तो वो अगस्त्य ऋषि को मारने पहुंचा। तब ऋषि ने सुंद को भस्म कर दिया। जब उसने अपने पति की मृत्यु के लिए अगस्त्य ऋषि से बदला लेना चाहा। ऐसी विषम परिस्थितियों में जब अगस्त्य ऋषि ने विश्वामित्र की सहायता मांगी तब विश्वामित्र अयोध्या जा कर दशरथ जी से उनके दोनों पुत्रों को यज्ञ की रक्षा के लिए मांग कर लाये और फिर राम और लक्ष्मण ने मिलकर ताड़का का संहार किया था।

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ताड़का कौन थी

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Vivek Hardaha

Vivek Hardaha

M.Sc. CS • M.A. Sociology • PGD Rural Dev.
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