खजुराहो मंदिर की कामुक मूर्तियाँ – असली रहस्य क्या है?
📅 28 नवंबर 2025 | 🕉️ खजुराहो मंदिर का गुप्त अर्थ
नमस्ते दोस्तों 🙏
खजुराहो मंदिर का नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में आता है – उन रहस्यमयी कामुक मूर्तियों का चित्रण जो मंदिर की बाहरी दीवारों पर उकेरा गया है। लोग अक्सर पूछते हैं –
“मंदिर में भगवान की पूजा होती है, फिर बाहर नग्न और मैथुन दृश्यों की मूर्तियाँ क्यों बनाई गईं?”
🕉️ असली रहस्य – “काम को पूरा करके आओ, तब मंदिर में प्रवेश करो”
प्राचीन तांत्रिक और योग शास्त्रों के अनुसार, जब तक मन में काम-वासना का भंवर चल रहा हो, तब तक भगवान के सामने खड़े होने का कोई मतलब नहीं। खजुराहो के चंदेल राजाओं ने बहुत गहरा तांत्रिक प्रयोग किया था।
मंदिर के बाहर जो कामुक मूर्तियाँ बनी हैं, उनका मुख्य उद्देश्य यह था कि –
- जो भक्त मंदिर आने वाला है, वह पहले इन मूर्तियों को देखे।
- अगर देखते ही उसका मन काम-भावनाओं से भर जाए, तो वह पहले अपनी वासना को पूरा करके आए।
- फिर दोबारा मूर्तियाँ देखे – अगर फिर भी मन भटके तो फिर वही क्रिया दोहराए।
- जब इन मूर्तियों को देखकर भी मन पूरी तरह शांत रहे, कोई विकार न उठे, तभी मंदिर के अंदर प्रवेश करे।
यही वो क्षण होता है जब इंसान इन्द्रियातीत हो चुका होता है। अब वह भगवान के सामने शुद्ध मन से खड़ा हो सकता है।
तंत्र शास्त्र का सबसे बड़ा प्रयोग
खजुराहो कोई साधारण मंदिर नहीं, बल्कि एक जीवंत तंत्र-साधना स्थल है। यहाँ वासना को दबाया नहीं जाता, बल्कि उसे पूरा करके पार किया जाता है – ठीक वैसे ही जैसे गौतम बुद्ध ने मारा (कामदेव) को पराजित करने से पहले उसकी हर इच्छा को पूरा होने दिया था।
“वासना को दबाओगे तो वह और बढ़ेगी,
उसे पूरा करके पार करोगे तो मुक्ति मिलेगी।”
~ खजुराहो का तांत्रिक सन्देश
आज भी काम करता है यह प्रयोग!
आज भी लाखों पर्यटक इन मूर्तियों को देखकर हैरान रह जाते हैं। जो समझ जाते हैं, वे चुपचाप मुस्कुराकर मंदिर में प्रवेश करते हैं। जो नहीं समझ पाते, वे बस फोटो खींचकर चले जाते हैं।
तो अगली बार जब आप खजुराहो जाएँ,
पहले बाहर की मूर्तियाँ देखें…
और खुद से पूछें –
“क्या मेरा मन अभी मंदिर में जाने लायक शांत है?”
आप क्या सोचते हैं?
क्या आपको लगता है यह तांत्रिक प्रयोग आज भी सही है?
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जय श्री राधे-कृष्ण 🙏
