माँ नर्मदा की पूजा कैसे करें? (सही विधि और दीपदान का नियम)

माँ नर्मदा की पूजा कैसे करें? (सही विधि और दीपदान का नियम)

नर्मदे हर! हम सभी माँ रेवा के भक्त हैं और अक्सर दर्शन के लिए घाटों पर जाते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि माँ नर्मदा की पूजा कैसे करें (Maa Narmada Ki Puja Kaise Karen) ताकि उन्हें प्रसन्नता हो, न कि कष्ट? अक्सर हम अज्ञानतावश पूजा के नाम पर नदी को प्रदूषित कर देते हैं।

आज हम जानेंगे कि शास्त्रों और पर्यावरण दोनों के अनुसार नर्मदा जी की पूजा की सबसे श्रेष्ठ विधि क्या है। याद रखिये, नर्मदा केवल नदी नहीं, साक्षात् शक्ति है। इनका जल ही हमारा और हमारे बच्चों का जीवन है।

पूजा जल में नहीं, तट पर करें

सबसे बड़ी गलती जो भक्त करते हैं, वह है पूजा सामग्री लेकर सीधे जल में घुस जाना। तेल, अगरबत्ती, और सिंदूर सीधे पानी में मिलाने से जल जहरीला हो जाता है।

सही तरीका क्या है?

माँ नर्मदा की पूजा हमेशा जल से दूर, सूखे घाट (तट) पर बैठकर करनी चाहिए। माँ रेवा तो भाव की भूखी हैं, उन्हें स्पर्श करने के लिए जल को गंदा करने की जरुरत नहीं है। तट की रेती की पूजा करना ही साक्षात् नर्मदा की पूजा है।

दीपक केवल आटे का ही जलाएं

बाजार में मिलने वाले पत्तल, थर्माकोल या प्लास्टिक के दीये नदी के लिए जहर हैं। ये पानी में गलते नहीं हैं और कचरे का ढेर बन जाते हैं।

मछलियों की सेवा ही माँ की सेवा है

नर्मदा जी की आरती या दीपदान के लिए हमेशा शुद्ध आटे का दीपक (Aata Ka Diya) बनाएं।

  • आटे का दीपक जब जल में विसर्जित होता है, तो वह गलकर मछलियों और कछुओं का भोजन बन जाता है।
  • यह 'जीव सेवा' है। जिस पूजा से किसी जीव का पेट भरे, उससे बड़ी पूजा कोई नहीं हो सकती।
  • प्लास्टिक का दीया किसी का पेट नहीं भरता, बल्कि नदी का दम घोंटता है।

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नर्मदा का जल दूषित होगा, तो हम कैसे जिएंगे?

नर्मदा का पानी केवल पूजा के लिए नहीं है, यह करोड़ों लोगों की प्यास बुझाता है और लाखों किसानों के खेतों को हरा-भरा करता है।

सोचिये, अगर हम घी, तेल, साबुन और केमिकल डालकर इस पानी को जहरीला बना देंगे, तो हमारे बच्चे भविष्य में क्या पिएंगे? क्या हम उनके लिए एक 'गंदा नाला' छोड़कर जाना चाहते हैं? साफ नर्मदा ही हमारे बच्चों का सुरक्षित भविष्य है।

अमरकंटक में जहां से माँ निकलती हैं, वहां जल एकदम निर्मल है। उस पवित्रता को बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। उद्गम स्थल की दिव्यता जानने के लिए पढ़ें: Maa Narmada Ji Ka Udgam Sthal Amarkantak Kaise Jayen.

पूजा की संक्षिप्त और सही विधि

अगली बार जब आप घाट पर जाएं, तो इस विधि का पालन करें:

  1. आचमन: हथेली में थोड़ा सा जल लेकर आचमन करें (पिएं नहीं, अगर जल साफ न हो तो केवल छिड़क लें)।
  2. स्थान: पानी से 5-10 कदम दूर सूखी जगह पर बैठें।
  3. अर्पण: फूल या अक्षत नदी में फेंकने के बजाय, तट की गीली मिट्टी पर चढ़ाएं।
  4. दीपदान: आटे का दीपक जलाएं और अंत में उसे ठण्डा करके जल में छोड़ दें ताकि मछलियां खा सकें।
  5. प्रार्थना: हाथ जोड़कर 'नर्मदे हर' का जाप करें और वहां पड़ा कोई कचरा उठाकर डस्टबिन में डालें।

निष्कर्ष: आस्था और स्वच्छता साथ-साथ

पूजा का अर्थ है- समर्पण। और आज माँ नर्मदा हमसे नारियल या चुनरी नहीं, बल्कि स्वच्छता मांग रही हैं। जल ही जीवन है, और अगर जल दूषित हो गया, तो कोई भी पूजा हमें नहीं बचा पाएगी।

FAQ: पूजा से जुड़े सवाल

नर्मदा जी की पूजा में कौन सा दीपक जलाना चाहिए?

नर्मदा जी की पूजा में हमेशा गेहूं के आटे (Wheat Flour) का दीपक जलाना चाहिए। यह पर्यावरण के अनुकूल है और जल में घुलने के बाद जलीय जीवों (मछलियों) के भोजन के काम आता है।

क्या हम नर्मदा जी में साबुन लगाकर नहा सकते हैं?

बिल्कुल नहीं। नदी में साबुन, शैम्पू या तेल का प्रयोग पूरी तरह वर्जित होना चाहिए। यह रसायनों से पानी को जहरीला बनाता है जो पीने योग्य नहीं रहता। घाट पर सादे पानी से ही स्नान करें।

नर्मदा जयंती पर घर पर पूजा कैसे करें?

अगर आप घाट पर नहीं जा सकते, तो घर पर एक लोटे में साफ जल लें, उसमें थोड़ा गंगाजल या नर्मदा जल मिलाएं। आटे का दीपक जलाकर 'त्वदीय पाद पंकजम, नमामि देवी नर्मदे' का जाप करें। यह भी उतनी ही फलदायी पूजा है।

✍️ Author: VH Original
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Vivek Hardaha

Vivek Hardaha

M.Sc. CS • M.A. Sociology • PGD Rural Dev.
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