Karpur Gauram Karunavtaram Lyrics & Meaning in Hindi | कर्पूरगौरं करुणावतारं (अर्थ सहित)

Karpur Gauram Karunavtaram Lyrics: कर्पूरगौरं करुणावतारं (अर्थ और भावार्थ)

ॐ नमः शिवाय! 🙏

क्या आपने कभी महसूस किया है? जब मंदिर में आरती समाप्त होती है, घंटियों की आवाज़ थमने लगती है, और एक दिव्य सन्नाटा छा जाता है... ठीक उसी पल, एक स्वर गूंजता है—

"कर्पूरगौरं करुणावतारं..."

यह केवल एक मंत्र नहीं है, यह भगवान शिव की पूर्ण पहचान (Identity) है। यजुर्वेद से लिया गया यह महामंत्र हमें बताता है कि शिव केवल 'संहार' के देवता नहीं हैं, बल्कि वे 'करुणा' (Compassion) के सागर हैं।

आज हम इस मंत्र के एक-एक शब्द में उतरेंगे और जानेंगे कि आखिर क्यों यह मंत्र हमारी आत्मा को इतना सुकून देता है।


Karpur Gauram Karunavtaram Lyrics Meaning Image
कर्पूरगौरं करुणावतारं - शिव का दिव्य रूप

🕉️ मंत्र लिरिक्स (Sanskrit & Hindi) 🕉️

कर्पूरगौरं करुणावतारं
संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे
भवं भवानीसहितं नमामि ॥


Karpur Gauram Karunavtaram
Sansara Saram Bhujagendra Haram |
Sada Vasantam Hridayaravinde
Bhavam Bhavani Sahitam Namami ||


📖 शब्द-दर-शब्द अर्थ (Word by Word Meaning)

इस मंत्र का असली जादू इसके एक-एक शब्द में छिपा है। इसे ध्यान से पढ़ें:

संस्कृत शब्द हिंदी अर्थ
कर्पूरगौरं कपूर के समान गौर (सफ़ेद/चमकदार) वर्ण वाले।
करुणावतारं जो साक्षात करुणा (दया) के अवतार हैं।
संसारसारं जो इस पूरे संसार का 'सार' (Main Essence) हैं।
भुजगेन्द्रहारम् जिन्होंने साँपों के राजा (नागराज) को हार के रूप में पहना है।
सदा वसन्तं जो हमेशा निवास करते हैं।
हृदयारविन्दे मेरे हृदय रूपी कमल (Lotus of Heart) में।
भवं भवानीसहितं नमामि उन भगवान शिव (भव) को माता पार्वती (भवानी) के साथ मैं नमन करता हूँ।

🌌 इस मंत्र का गहरा रहस्य (Deep Spiritual Meaning)

1. शिव 'कर्पूर' (Camphor) जैसे क्यों?
कपूर (Camphor) एक ऐसा पदार्थ है जो जलने के बाद कोई राख या अवशेष (Residue) नहीं छोड़ता, वह पूरी तरह हवा में विलीन हो जाता है। भगवान शिव भी ऐसे ही पवित्र और शुद्ध हैं। वे माया से परे हैं।

2. करुणावतारं (Incarnation of Compassion)
हम अक्सर शिव को 'रुद्र' या 'संहारक' के रूप में देखते हैं। लेकिन यह मंत्र याद दिलाता है कि वे 'करुणा' (Daya) के अवतार हैं। जब देवताओं पर संकट आया, तो उन्होंने विष पी लिया। यह उनकी करुणा ही तो थी।

Shiva Aarti Deep Daan Image
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे - मेरे हृदय में बसो

💡 विवेक भाई की सलाह (हृदय की बात)

दोस्तों, मैं (विवेक) आपसे एक सवाल पूछता हूँ—

जब मंदिर में आरती खत्म होती है, और पुजारी जी ये मंत्र बोलते हैं, तो क्या आपको भी एक खालीपन (Void) महसूस होता है? एक ऐसी शांति जो कहती है कि "बस, अब सब ठीक है।"

यह मंत्र भगवान शिव को मंदिर से निकालकर आपके हृदय (Heart) में स्थापित करने के लिए है। इसका अर्थ है— "हे प्रभु! अब पूजा खत्म हुई, अब आप मंदिर में नहीं, मेरे दिल के कमल (Lotus) में आकर बस जाइये।"

अगर आप आज मंदिर नहीं जा पाए, तो उदास न हों:

आप अपने घर या ऑफिस में बैठे-बैठे भी शिव जी को अपने हृदय में बुला सकते हैं।

हमने आपके लिए एक "ऑनलाइन पूजा टूल" बनाया है। आँखें बंद करें, इस मंत्र को सुनें और डिजिटल माध्यम से पुष्प अर्पित करें।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1. कर्पूरगौरं मंत्र आरती के बाद ही क्यों बोला जाता है?

आरती का मतलब है ईश्वर की बाहरी पूजा। यह मंत्र 'आत्म-निवेदन' है। हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि अब बाहरी पूजा समाप्त हुई, अब आप हमेशा के लिए मेरे मन (हृदय) में निवास करें।

Q2. 'संसारसारं' का क्या मतलब है?

इसका मतलब है कि पूरी दुनिया में अगर कोई 'सार' (Meaningful Substance) है, तो वो केवल शिव हैं। बाकी सब नश्वर है, केवल शिव ही सत्य हैं।

इस दिव्य मंत्र के अर्थ को अपने परिवार और बच्चों को जरूर बताएं ताकि वे भी इसका महत्व समझ सकें।

🚩 कर्पूरगौरं करुणावतारं... नमामि! 🚩

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Vivek Hardaha

Vivek Hardaha

M.Sc. CS • M.A. Sociology • PGD Rural Dev.
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