शिवरात्रि पर भांग पीना सही है? (Bhang Side Effects & Truth)

शिवरात्रि पर भांग पीना सही है? (Bhang Side Effects & Truth)

Har Har Mahadev! 🙏 महाशिवरात्रि आते ही बाज़ारों में ठंडाई घुटने लगती है और युवाओं के बीच एक अजीब सा ट्रेंड शुरू हो जाता है—"भोले का प्रसाद" समझकर भांग (Bhang) पीने का।

अक्सर लोग गूगल पर सर्च करते हैं: "Shivratri par bhang pina sahi hai ya galat?" या "क्या शिवजी सच में गांजा-भांग पीते थे?"

आज इस आर्टिकल में हम कड़वा सच बोलेंगे। अगर आप सच्चे शिव भक्त हैं, तो आपको यह जानना ही होगा कि कैसे "प्रसाद" के नाम पर नशा बेचा जा रहा है और कैसे हम अपने ही आराध्य (भगवान) का अपमान कर रहे हैं।

इस आर्टिकल के मुख्य बिंदु (Table of Contents):
  1. सीधा सवाल: क्या शिवरात्रि पर भांग पीनी चाहिए?
  2. Myth vs Reality: क्या शिवजी नशेड़ी थे? (कड़वा सच)
  3. "हलाहल विष" और "भांग" में अंतर
  4. आयुर्वेद क्या कहता है? (दवा या नशा?)
  5. नशे के साइड इफेक्ट्स (Health Warning)
  6. असली "शिव प्रसाद" क्या है?
  7. निष्कर्ष: बाकी आपकी मर्ज़ी!

1. सीधा सवाल: क्या शिवरात्रि पर भांग पीनी चाहिए?

⛔ हमारा जवाब: बिल्कुल नहीं! (Absolutely Not)

किसी भी शास्त्र, वेद या पुराण में यह नहीं लिखा है कि महाशिवरात्रि पर नशा करना अनिवार्य है। भगवान शिव को किसी भी तरह के नशे (Intoxication) या जीव हत्या से जोड़कर देखना घोर पाप और अज्ञानता है।

आजकल "भोले के प्रसाद" के नाम पर युवा पीढ़ी गांजा, चरस और भांग का सेवन कर रही है। याद रखिये, शिव "योगी" हैं, "भोगी" नहीं। जो परम चेतना (Supreme Consciousness) में लीन है, उसे किसी सस्ते नशे की जरूरत क्यों पड़ेगी?

2. Myth vs Reality: क्या शिवजी नशेड़ी थे?

समाज में कुछ ऐसे तत्व हैं जिन्होंने अपनी नशे की लत को सही ठहराने के लिए भगवान को ढाल बना लिया है। आइये दूध का दूध और पानी का पानी करते हैं:

❌ झूठ (Myth) ✅ सच (Reality)
"शिवजी हमेशा गांजा-भांग के नशे में रहते हैं।" शिवजी हमेशा "ध्यान" (Meditation) और समाधि में रहते हैं। उनका नशा "नाम-खुमारी" है, भांग की खुमारी नहीं।
"चिलम पीना शिवजी का प्रसाद है।" तस्वीरों में चिलम सिर्फ कलाकारों की कल्पना है। शिव पुराण में कहीं भी शिवजी के चिलम पीने का उल्लेख नहीं है।
"शिवरात्रि पर भांग पीने से मोक्ष मिलता है।" नशा करने से सिर्फ लिवर और दिमाग खराब होता है, मोक्ष तो दूर की बात है।

3. "हलाहल विष" का सच (नीलकंठ की कहानी)

कुछ लोग तर्क देते हैं—"अरे, शिवजी ने तो विष पिया था, हम तो सिर्फ भांग पी रहे हैं।"

जरा सोचिये! समुद्र मंथन के समय जब हलाहल विष (Halahal Poison) निकला, तो पूरी सृष्टि जलने लगी थी। तब महादेव ने उसे पिया नहीं, बल्कि अपने कंठ (गले) में रोक लिया। इसी कारण उनका नाम "नीलकंठ" पड़ा।

जो लोग शिवजी की नक़ल करना चाहते हैं, उनसे मेरा सवाल है—क्या आपमें जहर (Poison) पीने की क्षमता है? अगर आप जहर नहीं पी सकते, तो उनकी नक़ल करने का ढोंग क्यों? भगवान के त्याग को अपने "शौक" का बहाना मत बनाइये।

4. आयुर्वेद और भांग (दवा या नशा?)

हाँ, यह सच है कि आयुर्वेद में भांग के पौधे (Vijaya) का जिक्र है। लेकिन:

  • आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल "औषधि" (Medicine) के रूप में होता है, वो भी बहुत कम मात्रा में और शोधन (Purification) के बाद।
  • इसका प्रयोग दर्द निवारक या विशेष मानसिक रोगों के इलाज में होता था।

आज कल लोग इसे "Recreational Drug" (मजे के लिए नशा) की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। बिना वैद्य की सलाह के भांग खाना, दवाई की पूरी बोतल एक बार में पीने जैसा है—जो जहर बन जाती है।

5. नशे के खतरनाक साइड इफेक्ट्स (Health Warning)

शिवरात्रि पर कई लोग जोश-जोश में भांग पी तो लेते हैं, लेकिन उसके बाद जो होता है, वो किसी "भक्ति" से कम नहीं होता (हॉस्पिटल के चक्कर)।

भांग के नुकसान (Side Effects):

  • Panic Attacks: भांग पीने के बाद घबराहट, दिल की धड़कन बढ़ना और मरने का डर लगना आम बात है।
  • Hallucinations: इंसान को वो चीजें दिखने या सुनाई देने लगती हैं जो वहां हैं ही नहीं। यह मानसिक संतुलन बिगाड़ सकता है।
  • Dehydration: गला सुखना और उल्टियां होना।
  • Psychosis: लंबे समय तक सेवन करने से याददाश्त कमजोर हो जाती है और सोचने-समझने की शक्ति खत्म हो जाती है।

क्या आपको लगता है कि एक ऐसा पदार्थ जो आपकी बुद्धि (Intellect) को ही हर ले, वो "ज्ञान के देवता" शिव का प्रसाद हो सकता है?

6. तो फिर असली "शिव प्रसाद" क्या है?

अगर आप सच में शिवजी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो उन्हें वो चढ़ाइये जो सात्विक हो:

  • बेलपत्र: जो तीन गुणों (सत्व, रज, तम) के समर्पण का प्रतीक है।
  • जल/दूध: शीतलता का प्रतीक।
  • धतूरा: यह शिवजी को चढ़ाया जाता है क्योंकि यह विषैला है। चेतावनी: धतूरा शिवजी 'लेते' हैं ताकि दुनिया का विष कम हो, इसे 'खाना' नहीं होता।
  • मीठा प्रसाद: खीर, हलवा, या फल।

निष्कर्ष: बाकी आपकी मर्ज़ी!

दोस्तों, महाशिवरात्रि 2026 एक पवित्र मौका है खुद को जगाने का, न कि बेहोश करने का। शिव का अर्थ है "कल्याण"। नशा विनाश की ओर ले जाता है और कल्याण, विकास की ओर।

हमने आपको शास्त्र, विज्ञान और तर्क तीनों के आधार पर बता दिया कि Shivratri par bhang pina गलत क्यों है। हम किसी को जबरदस्ती रोक नहीं सकते।

😇 निर्णय आपका है:
आप "शिव" बनना चाहते हैं (जागृत और चैतन्य)
या "शव" बनना चाहते हैं (नशे में बेहोश)?

"नशा नाश कर देता है, चाहे वो पैसे का हो, पद का हो, या भांग का।"

अगर आप इस बात से सहमत हैं, तो इस आर्टिकल को शेयर करें और धर्म के नाम पर हो रहे नशे के व्यापार को रोकने में मदद करें। जय भोलेनाथ! 🙏

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Vivek Hardaha

Vivek Hardaha

M.Sc. CS • M.A. Sociology • PGD Rural Dev.
Web Creator since 2014