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Shiv Chalisa in Hindi Text: श्री शिव चालीसा पाठ (बड़े अक्षरों में)
जय भोलेनाथ! 🙏
भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे सरल और प्रभावशाली तरीका है—"श्री शिव चालीसा" (Shiv Chalisa) का पाठ। 40 चौपाइयों में रची गई यह प्रार्थना इतनी शक्तिशाली है कि इसके नियमित पाठ से कठिन से कठिन संकट भी टल जाते हैं।
हमारे बहुत से पाठक मोबाइल पर छोटा टेक्स्ट पढ़ने में परेशानी महसूस करते हैं। इसलिए, आज हम आपके लिए "बड़े फॉन्ट" (Large Font) में शिव चालीसा लेकर आए हैं, ताकि आप बिना किसी परेशानी के पूरी भक्ति के साथ इसका पाठ कर सकें।
🕉️ श्री शिव चालीसा (सम्पूर्ण) 🕉️
॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान ।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥
॥ चौपाई ॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत संतन प्रतिपाला ॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥
अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाये ॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे ॥
मैना मातु की ह्वै दुलारी ।
वाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
या छवि को कहि जात न काऊ ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा ।
तबहीं दुख प्रभु आप निवारा ॥
किया उपद्रव तारक भारी ।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥
तुरत षडानन आप पठायउ ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥
आप जलंधर असुर संहारा ।
सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥
किया तपहिं भागीरथ भारी ।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥
वेद माहि महिमा तुम गाई ।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
जरत सुरासुर भये विहाला ॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा ।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥
सहस कमल में हो रहे धारी ।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
कमल नयन पूजन चहं सोई ॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
भये प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
करत कृपा सब के घट वासी ॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
संकट से मोहि आन उबारो ॥
मात-पिता भ्राता सब कोई ।
संकट में पूछत नहिं कोई ॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
आय हरहु मम संकट भारी ॥
धन निर्धन को देत सदा हीं ।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥
शंकर हो संकट के नाशन ।
मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
शारद नारद शीश नवावैं ॥
नमो नमो जय नमः शिवाय ।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥
जो यह पाठ करे मन लाई ।
ता पर होत है शम्भु सहाई ॥
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
पाठ करे सो पावन हारी ॥
पुत्र होन की इच्छा जोई ।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥
जन्म-जन्म के पाप नसावे ।
अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥
॥ दोहा ॥
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीस ।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश ॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥
🔗 शिवरात्रि स्पेशल (ज़रूर पढ़ें):
✨ शिव चालीसा पढ़ने के 5 बड़े फायदे
- मानसिक शांति: सुबह-सुबह इसका पाठ करने से मन शांत रहता है और दिनभर तनाव नहीं होता।
- कष्टों का निवारण: चौपाई कहती है—"संकट से मोहि आन उबारो"। यह पाठ हर तरह की मुसीबतों से बचाता है।
- संतान प्राप्ति: "पुत्र होन की इच्छा जोई, निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई"। जो दंपत्ति संतान सुख चाहते हैं, उनके लिए यह पाठ वरदान है।
- धन और समृद्धि: "धन निर्धन को देत सदा हीं"। भोलेनाथ अपने भक्तों के भंडार हमेशा भरे रखते हैं।
- पाप नाश: इसका नियमित पाठ जन्मों-जन्मों के पापों को नष्ट करता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
💡 विवेक भाई की सलाह (भक्ति में शक्ति)
दोस्तों, मैं (विवेक) अक्सर देखता हूँ कि लोग पूजा करना चाहते हैं, लेकिन समय की कमी या सही विधि न जानने के कारण पीछे हट जाते हैं।
शिव चालीसा का पाठ करना बहुत आसान है। इसके लिए किसी विशेष आडंबर की जरूरत नहीं है। बस एक लोटा जल और सच्ची श्रद्धा ही काफी है।
क्या आप अभी पूरा पाठ नहीं कर सकते?
कोई बात नहीं! आप हमारे "डिजिटल पूजा टूल" का इस्तेमाल करके सिर्फ 2 मिनट में मानसिक पूजा कर सकते हैं।
📱 2 मिनट की ऑनलाइन शिव पूजा
शिवलिंग पर फूल चढ़ाएं, दीप जलाएं और 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें।
👉 यहाँ क्लिक करें (Start Puja)
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. शिव चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?
सूर्योदय के समय (सुबह) या सूर्यास्त के समय (प्रदोष काल) इसका पाठ करना सबसे उत्तम माना जाता है।
Q2. क्या शिव चालीसा को रोज पढ़ना जरूरी है?
अगर संभव हो तो रोज पढ़ें, नहीं तो सोमवार और मासिक शिवरात्रि के दिन जरूर पढ़ें।
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🚩 ॐ नमः शिवाय! 🚩