हनुमान चालीसा चौपाई पाठ | Hanuman Chalisa lyrics in Hindi

श्री हनुमान चालीसा पाठ: अर्थ, नियम, लाभ और PDF | Hanuman Chalisa in Hindi

श्री हनुमान चालीसा पाठ | Hanuman Chalisa lyrics in Hindi
श्री हनुमान चालीसा चौपाई पाठ | Hanuman Chalisa lyrics in Hindi

जय श्री राम! कलयुग में अगर सबसे जल्दी कोई देवता प्रसन्न होते हैं, तो वे हैं संकटमोचन हनुमान जी। श्री हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित एक ऐसी चमत्कारी प्रार्थना है, जिसका पाठ करने से मनुष्य के जीवन के सभी संकट, रोग और भय दूर हो जाते हैं। आज इस आर्टिकल में हम न सिर्फ आपको संपूर्ण हनुमान चालीसा का पाठ (Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi) दे रहे हैं, बल्कि इसके नियम, फायदे और भावार्थ भी विस्तार से बता रहे हैं।

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हनुमान चालीसा का इतिहास: यह कब और कहाँ लिखी गई?

क्या आप जानते हैं कि हनुमान चालीसा की रचना किसी मंदिर या आश्रम में नहीं, बल्कि मुग़ल सम्राट अकबर की जेल में हुई थी? जी हाँ! जब अकबर ने तुलसीदास जी को चमत्कार दिखाने के लिए बंदी बना लिया था, तब उन्होंने 40 दिनों तक जेल में रहकर अवधी भाषा में इन 40 चौपाइयों (चालीसा) की रचना की थी। 40वें दिन वानरों की एक विशाल सेना ने फतेहपुर सीकरी पर हमला कर दिया, जिसके बाद अकबर को झुकना पड़ा।

इस ऐतिहासिक घटना के बारे में विस्तार से जानने के लिए हमारा यह लेख जरूर पढ़ें: हनुमान चालीसा कहाँ लिखी गई थी? तुलसीदास जी और अकबर का प्रसंग

Hanuman Chalisa Video (हनुमान चालीसा वीडियो)

पाठ शुरू करने से पहले, यदि आप हनुमान चालीसा सुनना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए वीडियो को प्ले करें और भक्तिमय वातावरण का आनंद लें:



चित्रों के साथ पाठ: जो लोग चित्रों के माध्यम से पाठ करना पसंद करते हैं, उनके लिए हमने विशेष रूप से हनुमान चालीसा चित्र सहित (Image Format) भी तैयार की है।

श्री हनुमान चालीसा सम्पूर्ण पाठ (Shri Hanuman Chalisa in Hindi)

दोहा

श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार।।

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥


राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥


महावीर विक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी॥


कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुंडल कुँचित केसा॥


हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे
काँधे मूँज जनेऊ साजे॥


शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज प्रताप महा जगवंदन॥


विद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर॥


प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मन बसिया॥


सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा
बिकट रूप धरि लंक जरावा॥


भीम रूप धरि असुर सँहारे
रामचंद्र के काज सँवारे॥१०


लाय संजीवन लखन जियाए
श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥११


रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥१२


सहस बदन तुम्हरो जस गावै
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥१३


सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा॥१४


जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कवि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥१५


तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥१६


तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना
लंकेश्वर भये सब जग जाना॥१७


जुग सहस्त्र जोजन पर भानू
लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥१८


प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं
जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥१९


दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०


🔥 शक्तिशाली पाठ: विशेष संकट के समय हनुमान चालीसा के साथ-साथ इन चमत्कारी पाठों को भी जरूर करें: बजरंग बाण का पाठ (Bajrang Baan) और संकटमोचन हनुमान अष्टक (Hanuman Ashtak)
राम दुआरे तुम रखवारे
होत ना आज्ञा बिनु पैसारे॥२१


सब सुख लहैं तुम्हारी सरना
तुम रक्षक काहु को डरना॥२२


आपन तेज सम्हारो आपै
तीनों लोक हाँक तै कापै॥२३


भूत पिशाच निकट नहिं आवै
महावीर जब नाम सुनावै॥२४


नासै रोग हरे सब पीरा
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५


संकट तै हनुमान छुडावै
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥२६


सब पर राम तपस्वी राजा
तिन के काज सकल तुम साजा॥२७


और मनोरथ जो कोई लावै
सोई अमित जीवन फल पावै॥२८


चारों जुग परताप तुम्हारा
है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९


साधु संत के तुम रखवारे
असुर निकंदन राम दुलारे॥३०


अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता
अस बर दीन जानकी माता॥३१


राम रसायन तुम्हरे पासा
सदा रहो रघुपति के दासा॥३२


तुम्हरे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३


अंतकाल रघुवरपुर जाई
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥३४


और देवता चित्त ना धरई
हनुमत सेई सर्व सुख करई॥३५


संकट कटै मिटै सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६


जै जै जै हनुमान गोसाई
कृपा करहु गुरु देव की नाई॥३७


जो सत बार पाठ कर कोई
छूटहिं बंदि महा सुख होई॥३८


जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥३९


तुलसीदास सदा हरि चेरा
कीजै नाथ हृदय मह डेरा॥४०


दोहा

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

हनुमान चालीसा पढ़ने के अचूक नियम और लाभ (Rules & Benefits)

श्री हनुमान चालीसा का पाठ यूं तो कभी भी किया जा सकता है, लेकिन यदि आप विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए इसे कर रहे हैं, तो इसके कुछ शास्त्रोक्त नियम होते हैं। सही विधि से किया गया पाठ शीघ्र फलदायी होता है।

Hanuman Chalisa PDF Download in Hindi (स्मार्ट तरीका)

अगर आप इस संपूर्ण हनुमान चालीसा को PDF Format में अपने फोन में सेव करना चाहते हैं ताकि बिना इंटरनेट के भी पढ़ सकें, तो इसका तरीका बहुत आसान है। अपने मोबाइल ब्राउज़र के ऊपर दाहिने कोने में तीन डॉट्स (⋮) पर क्लिक करें, फिर 'Share' पर जाएं और 'Print' का विकल्प चुनें। वहाँ से आप सीधे 'Save as PDF' करके इस पेज को अपने फोन में डाउनलोड कर सकते हैं।

डिजिटल संकल्प: क्या आप जानते हैं कि डिजिटल युग में संकल्प लेकर पाठ कैसे किया जाता है? इसका सही तरीका और अर्थ यहाँ जानें: हनुमान चालीसा अर्थ और डिजिटल संकल्प जाप की विधि

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. हनुमान चालीसा का पाठ दिन में कितनी बार करना चाहिए?

वैसे तो आप अपनी श्रद्धा अनुसार 1, 3, 7 या 11 बार पाठ कर सकते हैं, लेकिन गोस्वामी तुलसीदास जी ने स्वयं लिखा है "जो सत बार पाठ कर कोई, छूटहिं बंदि महा सुख होई"। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: हनुमान चालीसा का पाठ कितनी बार करना चाहिए?

2. हनुमान जी हमेशा अपने हाथ में गदा क्यों रखते हैं?

हनुमान जी की गदा 'कौमोदकी' है, जो उन्हें कुबेर जी से प्राप्त हुई थी। यह गदा बुराई के विनाश और धर्म की रक्षा का प्रतीक है। इसका पूरा रहस्य यहाँ पढ़ें: हनुमान जी गदा क्यों रखते हैं?

3. चालीसा के पाठ के बाद क्या करना चाहिए?

पाठ पूरा होने के बाद प्रभु श्री राम और हनुमान जी की वंदना अवश्य करनी चाहिए ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। यहाँ पढ़ें: श्री हनुमान वंदना के बोल (Lyrics in Hindi)

🙏 क्षमा प्रार्थना और डिस्क्लेमर

क्षमा प्रार्थना: श्री हनुमान चालीसा की इस पोस्ट को टाइप करते समय या तकनीकी कारणों से यदि किसी मात्रा, शब्द या चौपाई में कोई त्रुटि (गलती) रह गई हो, तो हम परम कृपालु श्री राम भक्त हनुमान जी और आप सभी श्रद्धालु पाठकों से हाथ जोड़कर क्षमा मांगते हैं। प्रभु हमारे भावों को ग्रहण करें।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई पाठ विधि, नियम और ऐतिहासिक जानकारियां विभिन्न धार्मिक ग्रंथों, मान्यताओं और इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री पर आधारित हैं। vhoriginal.com इनकी पूर्ण सटीकता का दावा नहीं करता है। किसी भी विशेष अनुष्ठान को करने से पहले अपने योग्य पंडित या गुरु से सलाह अवश्य लें।

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Vivek Hardaha

Vivek Hardaha

M.Sc. CS • M.A. Sociology • PGD Rural Dev.
Web Creator since 2014