लघु कहानी - आदत से लाचार मेढ़क | laghu kahani

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प्रेरणदायक कहानियां "आदत से लाचार मेढ़क"

प्रेरणदायक कहानियां "आदत से लाचार मेढ़क" लघु कहानी

एक समय की बात है एक मेंढक रोज की तरह मक्खियों का शिकार कर रहा था। उसी समय एक सांप वहां से गुजर रहा था। सांप की नजर उस मेढक पर पड़ जाती है सांप सोचता है चलो आज के भोजन का प्रबंध हुआ। और सांप उस मेढ़क को पीछे की ओर से एक झटके में आधा मुंह में भर लेता है।


अब स्थिति ये है की मेढक के शरीर का पीछे का आधा हिस्सा सांप के मुंह में है और आगे का आधा हिस्सा मुंह के बाहर तभी उस मेढक के सामने से एक मक्खी उड़ती हुई आती है। और मेढ़क सांप के मुंह में दबे होने के बाद भी उस मक्खी के खाने के लिए अपनी जीभ बाहर निकालता है और उसे पकड़ने की कोशिश करता है। इसी को कहते है "आदत से लाचार होना" एक मेंढक जो सांप के मुँह में दबे होने के बाद भी अपनी आदत के कारण सामने आने वाली मक्खियों को खाने के लिए जीभ निकलता है। ये उसकी आदत है जिसे वो अपनी मौत को सामने देखते हुए भी छोड़ नहीं पाता।


"याद रखें आपकी आदत ही आपका भविष्य तय करती है समय रहते अपनी बुरी आदतों को बदलें"


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