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श्री नर्मदा अष्टक लिरिक्स (Narmada Ashtakam Lyrics) — त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे — लिखा हुआ पाठ + HD इमेज। इस पेज पर पूरा अष्टक, सरल हिंदी अर्थ, पाठ का महत्व, और फोटो सेव/शेयर का तरीका एक जगह मिलेगा। घर-मंदिर या घाट पर शांत मन से पढ़ने के लिए। हर हर नर्मदे।

नर्मदा अष्टक क्या है और क्यों पढ़ते हैं?
अष्टक का सीधा मतलब है आठ श्लोकों वाला स्तोत्र। श्री नर्मदा अष्टक में माँ नर्मदा की स्तुति है — उनके जल, किनारे, ऋषि-सेवा और भक्तों के भय-हरण का वर्णन। हर श्लोक के अंत में मंत्र जैसा विनय आता है: त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे — हे देवी नर्मदा, आपके चरण-कमलों को प्रणाम।
बहुत से लोग गूगल पर “नर्मदा अष्टक लिखा हुआ”, “tvadiya pad pankajam”, या “Narmada Ashtakam lyrics image” सर्च करते हैं क्योंकि पूरा पाठ याद नहीं रहता। लिखा हुआ टेक्स्ट और साफ इमेज साथ हों तो रोज का पाठ आसान हो जाता है। WhatsApp पर शेयर करते समय भी इमेज काम आती है।
श्रद्धालु मानते हैं कि माँ नर्मदा का स्थान अत्यंत पवित्र है। लोककथाओं में कहा जाता है कि माँ गंगा को भी एक बार पवित्र होने के लिए माँ नर्मदा के पास आना पड़ा था — ये आस्था की कहानी है, वैज्ञानिक रिपोर्ट नहीं। फिर भी इससे गाँव-घर में नर्मदा के प्रति जो माँ वाला भाव है, वो साफ झलकता है। दर्शन, परिक्रमा या घर पर “नर्मदे हर” बोलना — तीनों श्रद्धा के रूप हैं।
पाठ का मकसद दिखावा या “अंक” गिनना नहीं। शांत बैठकर शब्दों का भाव समझना, परिवार को साथ बिठाना, और नदी-पानी के प्रति कृतज्ञता रखना — यही सरल धर्म। जो संस्कृत में अटकते हैं, वे नीचे दिए हिंदी अर्थ से भाव जोड़ सकते हैं।
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पूर्ण श्री नर्मदा अष्टकम लिरिक्स (Shri Narmada Ashtakam)
नीचे वही पारंपरिक लिखा हुआ पाठ है जो इस पेज पर पहले से सुरक्षित रखा गया है। धीरे-धीरे पढ़ें; जल्दबाज़ी में गलत उच्चारण दोहराने से बेहतर है एक श्लोक साफ पढ़ना। मोबाइल पर फॉन्ट बड़ा करके भी पढ़ सकते हैं।
सबिंदु सिन्धु सुस्खल तरंग भंग रंजितम
द्विषत्सु पाप जात जात कारि वारि संयुतम
कृतान्त दूत काल भुत भीति हारि वर्मदे
त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे 1
त्वदम्बु लीन दीन मीन दिव्य सम्प्रदायकम
कलौ मलौघ भारहारि सर्वतीर्थ नायकं
सुमस्त्य कच्छ नक्र चक्र चक्रवाक् शर्मदे
त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे 2
महागभीर नीर पुर पापधुत भूतलं
ध्वनत समस्त पातकारि दरितापदाचलम
गतं तदैव में भयं त्वदम्बु वीक्षितम यदा
मृकुंडूसूनु शौनका सुरारी सेवी सर्वदा
पुनर्भवाब्धि जन्मजं भवाब्धि दुःख वर्मदे
त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे 4
अलक्षलक्ष किन्न रामरासुरादी पूजितं
सुलक्ष नीर तीर धीर पक्षीलक्ष कुजितम
वशिष्ठशिष्ट पिप्पलाद कर्दमादि शर्मदे
त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे 5
सनत्कुमार नाचिकेत कश्यपात्रि षटपदै
धृतम स्वकीय मानषेशु नारदादि षटपदै:
रविन्दु रन्ति देवदेव राजकर्म शर्मदे
त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे 6
अलक्षलक्ष लक्षपाप लक्ष सार सायुधं
ततस्तु जीवजंतु तंतु भुक्तिमुक्ति दायकं
विरन्ची विष्णु शंकरं स्वकीयधाम वर्मदे
त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे 7
अहोमृतम श्रुवन श्रुतम महेषकेश जातटे
किरात सूत वाड़वेषु पण्डिते शठे नटे
दुरंत पाप ताप हारि सर्वजंतु शर्मदे
त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे 8
इदन्तु नर्मदाष्टकम त्रिकलामेव ये सदा
पठन्ति ते निरंतरम न यान्ति दुर्गतिम कदा
सुलभ्य देव दुर्लभं महेशधाम गौरवम
पुनर्भवा नरा न वै त्रिलोकयंती रौरवम 9
नोट: कुछ किताबों/ऑडियो में श्लोक क्रमांक या कुछ शब्द थोड़े अलग मिल सकते हैं। यहाँ मूल पेज वाला पाठ ज्यों-का-त्यों रखा गया है ताकि पुराने पाठक भ्रमित न हों।
श्री नर्मदा अष्टकम हिंदी अर्थ (सरल अनुवाद)
अर्थ समझने से पाठ सिर्फ रटना नहीं रह जाता। नीचे प्रत्येक श्लोक का पारंपरिक हिंदी भावार्थ है — आस्था की भाषा में। इसे शब्द-शब्द कानूनी अनुवाद न समझें; भक्ति का सार समझने के लिए पढ़ें।
यम-दूतों तथा (सर्वदा) कल-भूतों के भय का हरण करके, रक्षा करनेवाली, हे माँ नर्मदा देवि ! अपने जल-कणों द्वारा समुद्र की उछलती हुई लहरों में रोचक दृश्य उत्पन्न करने वाले तथा शत्रुओं के भी पाप-समुदाय को नाश करने वाले, निर्मल जल-सहित आपके चरण कमलों को में नमस्कार करता हूँ ॥१॥
मत्स्य (मछ्ली), कच्छ (कछुआ), नक्र (मगर) इत्यादि जल-जींव-समुदाय, तथा चक्रवाक (चकई-चकवा) आदि पक्षी-समुदाय को सुख देनेवाली हे नर्मदा जी ! आपके जल मे मग्न रहनेवाले दीन-दु:खी मतस्यों को दिव्य (स्वर्ग) पद देनेवाले, तथा इस कलियुग के पापपुजरूपी भार को हारनेवाली, और सर्व तीर्थों (जालों) मे श्रेष्ठ ऐसे जल-युक्त आपके चरणकमलों को मै प्रणाम करता हूँ ।।२।।
महान भयंकर संसार के प्रलय में मार्कण्डेय ऋषि को आश्रय देनेवाली, हे नर्मदा देवि ! अत्यंत गंभीर जल के प्रवाह द्वारा पृथ्वी-तल के पापों को धोनेवाले, तथा अपने कलकल शब्दों द्वारा समस्त पातकों को नाश करने वाले तथा संकटों के पर्वतों को विदीर्ण करने वाले, ऐसे आपके जलयुक्त चरण – कमलों को मै प्रणाम करता हूँ ॥३॥
मार्कण्डेय, शौनक, तथा देवताओं से निरंतर सेवन किए गए,आपके जल को जिस समय मैंने देखा, उसी समय मेरे जन्म-मरण-रूप दु:ख और संसार-सागर मे उत्पन्न हुए समस्त भय भाग गए । संसाररूपी समुद्र के दु:खों से मुक्त करेने वाली, हे नर्मदा जी ! आपके चरणकमलों को मै प्रणाम करता हूँ ॥४॥
वसिष्ठ ऋषि, श्रेष्ठ पिप्पलाद ऋषि, तथा कर्दम आदि ऋषियों को सुख देने वाली, हे माँ नर्मदा देवि ! अदृश्य लाखों किन्नरों (देवयोनि विशेष ), देवताओं, तथा मनुष्यों से पूजन किए गए, और प्रत्यक्ष आपके जल के किनारे निवास करने वाले लाखों पक्षियों से कूजित (किलकिलाहट) किए गए, आपके चरण कमलों को मे प्रणाम करता हूँ॥५॥
सूर्य, चन्द्र, रविन्तदेव, और इंद्रादि देवताओं को सुख देनेवाली, हे माँ नर्मदा जी ! सनत्कुमार नाचिकेत, कस्यप, आत्रि, तथा नारदादि ऋषिरूप जो भ्रमर उनसे अपने-अपने मन मैं धारण किए गए, ऐसे आपके चरण कमलों को मैं बार-बार प्रणाम करता हूँ ॥६॥
ब्रह्मा, विष्णु, तथा इनको अपना-अपना पद (सामर्थ्य तथा स्थान) देनेवाली, हे माँ नर्मदा देवि ! जिनकी गणना करने को मन भी नहीं पहुचता, ऐसे असंख्य पापों को नाश करने के लिए प्रबल आयुध (तीक्ष्णा तलवार) के समान, तथा आपके किनारे पर रहनेवाले जीव ( बड़े-बड़े प्राणी) जन्तु (छोटे प्राणी) तन्तु (लता-वीरुध) अर्थात् स्थावर-जंगल समस्त प्राणियों को इस लोक का सुख तथा परलोक (मुक्ति) का सुख देनेवाले, ऐसे आपके चरणकमलों को मै प्रणाम करता हूँ ॥७॥
शंकर जी की जटाओं से उत्पन्न रेवा जी के किनारे मैंने अमृत के समान आनंददायक कलकल शब्द सुना, समस्त जाति के प्राणियों को सुख देनेवाली, हे माँ नर्मदा जी ! किरात (भील) सूत ( भाट ) बाडव (ब्राह्मण) पंडित (विद्वान) शठ (धूर्त) और नट, इनके अनंत पाप पुंजों के तापों को हरण करनेवाली, ऐसे आपके चरण कमलों को मै प्रणाम करता हूँ ॥८॥
जो भी इस नर्मदाष्टक का प्रति-दिन तीन कल ( प्रात:, सायं, मध्यान्ह) मे पाठ करते है, वे कभी भी दुर्गति को नहीं प्राप्त होते, तथा अन्य लोकों को दुर्लभ ऐसे सुंदर शरीर धरण का कर शिवलोक को गमन करते है, तथा इस लोक मे सुख पाते है और पुनर्जन्म के बंधन से छूट कर कभी भी रौरवादि नरकों को नहीं देखते ॥९॥
नर्मदा अष्टक पाठ का महत्व और लाभ (श्रद्धा)
माँ नर्मदा कल-कल बहती रहती हैं। हज़ारों श्रद्धालु नर्मदा परिक्रमा भी करते हैं। शास्त्र-श्रद्धा के अनुसार शंकर जी से जुड़ी परम पवित्र नदी माँ नर्मदा के पास, या घर में साफ जगह पर, पूरी श्रद्धा से अष्टक पढ़ने पर मन शांत होता है और भक्त माँ की कृपा का अनुभव करते हैं।
फल-श्रुति में कहा गया है कि जो नित्य त्रिकाल पाठ करते हैं वे दुर्गति से बचते हैं और शिवलोक का गौरव पाते हैं — ये भक्ति-वाक्य हैं, कोई सरकारी प्रमाण-पत्र नहीं। घर में एक दीपक, स्वच्छ आसन और सच्चा प्रणाम भी काफी है। बच्चों को साथ बिठाकर दो-चार लाइन समझाना पीढ़ी की कड़ी जोड़ता है।
लोकश्रुति है कि माँ गंगा को भी पवित्र होने के लिए एक बार माँ नर्मदा के पास आना पड़ा था। इसलिए कई भक्त माँ नर्मदा को विशेष पूज्य मानते हैं। हर हर माँ नर्मदे — ये जयकारा घाट से लेकर शहर के छोटे मंदिर तक सुनाई देता है।
- पाठ से पहले हाथ-मुँह धो लें; मन शांत रखें।
- गलत उच्चारण का डर हो तो इमेज/टेक्स्ट देखकर धीरे पढ़ें।
- भीड़ वाले घाट पर फोन साइलेंट रखें; दूसरों की आरती में बाधा न डालें।
- नदी में फूल-प्लास्टिक न फेंकें — माँ का घर साफ रखना भी सेवा है।
कैसे पढ़ें — समय, भाव और साधारण नियम
पारंपरिक सुझाव: प्रातः, मध्यान्ह और सायंकाल — तीन समय। व्यस्त दिन में एक समय भी ठीक। स्नान के बाद या पूजा के समय पढ़ना सुविधाजनक लगता है। स्त्रियाँ-पुरुष सब पढ़ सकते हैं; जाति-पढ़ाई का दिखावा नहीं चाहिए।
अगर संस्कृत कठिन लगे तो पहले हिंदी अर्थ पढ़कर भाव बाँध लें, फिर मूल श्लोक। ऑडियो सुनकर ताल मिलाना भी ठीक तरीका है — ऊपर दिए छोटे ऑडियो टीज़र के अलावा आप परिवार के किसी बुज़ुर्ग की आवाज़ भी रिकॉर्ड करके अभ्यास कर सकते हैं।
पाठ “मनोकामना पूरी कराने की मशीन” नहीं। इच्छाएँ हों तो माँ के चरणों में रख दें; परिणाम पर जल्दी और तुलना छोड़ दें। जो बीमार या बुज़ुर्ग हैं, वे घर बैठे ही पढ़ें — घाट की मजबूरी नहीं। नदी जाएँ तो गहराई अनजान हो सकती है; बच्चों-बुज़ुर्गों का हाथ पकड़ें, नशा/लापरवाही न करें।
लिरिक्स इमेज सेव और शेयर कैसे करें?
ऊपर वाली HD फोटो पर टैप/क्लिक करें — बड़ी इमेज खुलेगी। फोन में Save Image / Download चुनें। गैलरी से WhatsApp Status, परिवार ग्रुप या प्रिंट के लिए भेज सकते हैं। स्क्रीनशॉट से बेहतर मूल फाइल सेव करें ताकि अक्षर साफ रहें।
कैप्शन छोटा रखें — “त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे — हर हर नर्मदे।” झूठी चमत्कार-गारंटी या डरावने फॉरवर्ड मैसेज न जोड़ें। माँ के नाम पर गलत दावा फैलाना श्रद्धा के विपरीत है।
प्रिंट निकालकर पूजा-कोने में लगाना चाहें तो A4 पर साफ प्रिंट लें; पानी/तेल से बचाकर रखें। मंदिर में चढ़ाते समय पुजारी की अनुमति लें।
| विषय | संक्षेप |
|---|---|
| मुख्य मंत्र-पंक्ति | त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे |
| पाठ का रूप | अष्टक (८ श्लोक + फलश्रुति) |
| भाषा | संस्कृत लिरिक्स + हिंदी अर्थ |
| इमेज | लिखा हुआ HD फोटो (सेव/शेयर) |
| सहायक पेज | आरती PDF, जन्मोत्सव शुभकामना |
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
नर्मदा अष्टक किसने लिखा है?
परंपरा में श्री आदि शंकराचार्य जी से जुड़ा यह स्तोत्र माना जाता है। क्षेत्र और ग्रंथ-परंपरा में पाठभेद हो सकते हैं। श्रद्धा से पढ़ें; किसी एक “सही कॉपी” का झगड़ा न करें।
त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे का अर्थ क्या है?
सरल भाव में — हे देवी नर्मदा, आपके चरण-कमलों को मैं प्रणाम करता/करती हूँ। हर श्लोक के अंत में यही विनय दोहराई जाती है।
अष्टक दिन में कितनी बार पढ़ें?
फल-श्रुति में त्रिकाल (प्रातः, मध्यान्ह, सायंकाल) का उल्लेख मिलता है। घर में एक बार शांत भाव से पढ़ना भी ठीक है। जल्दबाज़ी से ज़्यादा शुद्ध भाव महत्वपूर्ण है।
क्या सिर्फ इमेज देखना काफी है?
इमेज याद रखने और शेयर करने में मदद करती है। पाठ का स्वाद तब आता है जब धीरे-धीरे शब्द पढ़े जाएँ। दोनों साथ रखें — फोटो + लिरिक्स।
डिस्क्लेमर: ये श्रद्धा और सामान्य जानकारी वाला लेख है। पाप-नाश, मुक्ति, मनोकामना या चमत्कार जैसे उल्लेख आस्था की पारंपरिक भाषा हैं — चिकित्सकीय, कानूनी, वित्तीय या ज्योतिषीय सलाह/गारंटी नहीं। नदी-घाट सुरक्षा के सुझाव सामान्य सावधानी हैं; स्थानीय नियम व प्रशासन प्राथमिक हैं। पाठभेद संभव; सबकी भावना का सम्मान करें। हर हर नर्मदे।

