नर्मदा जी की कहानी | एक प्यार और दर्द भरी कहानी | नर्मदा नदी की कहानी | Narmada ji ki Pyar Bhari Kahani

नर्मदा जयंती 2026: माँ नर्मदा की प्यार और विरह की वो कहानी, जो पत्थर को भी पिघला दे

भारत की पावन धरती पर सात प्रमुख नदियाँ बहती हैं, जिन्हें 'सप्त सिंधु' कहा जाता है। इनमें माँ नर्मदा का स्थान सबसे निराला और रहस्यमयी है। जहाँ अन्य नदियाँ पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में मिलती हैं, वहीं नर्मदा अपने स्वाभिमान और विरह की गाथा समेटे पश्चिम की ओर, यानी उल्टी दिशा में बहती हैं।

नर्मदा नदी की कहानी | Narmada ji ki Kahani
नर्मदा नदी की कहानी | Narmada ji ki Kahani

नर्मदा केवल एक नदी नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश और गुजरात की जीवन रेखा है। 1312 किलोमीटर का सफर तय करने वाली यह नदी अमरकंटक की पहाड़ियों से निकलकर खंभात की खाड़ी में विलीन हो जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक नदी के उल्टी दिशा में बहने के पीछे की असली वजह क्या है? यह कहानी है एक राजकुमारी के अटूट प्रेम, विश्वासघात और फिर आजीवन कुंवारी रहने के कठोर संकल्प की।

राजकुमारी नर्मदा और राजकुमार सोनभद्र की प्रेम गाथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, नर्मदा राजा मैखल की अत्यंत रूपवती पुत्री थीं। जब नर्मदा विवाह योग्य हुईं, तो राजा मैखल ने एक कठिन शर्त रखी। उन्होंने घोषणा की कि जो भी राजकुमार दुर्लभ 'गुलबकावली' का पुष्प लेकर आएगा, राजकुमारी का विवाह उसी से होगा।

देश-विदेश के कई राजकुमार आए, लेकिन कोई सफल नहीं हुआ। अंत में राजकुमार सोनभद्र आए और अपनी वीरता व लगन से वो दुर्लभ पुष्प ले आए। राजा मैखल को अपना वचन निभाना था। नर्मदा और सोनभद्र का विवाह तय हो गया। नर्मदा ने जब सोनभद्र के बारे में सुना, तो वह मन ही मन उन्हें अपना सर्वस्व मान बैठीं।

जुहिला का वो विश्वासघात और नर्मदा का क्रोध

विवाह की तैयारियाँ चल रही थीं, लेकिन राजकुमारी नर्मदा के मन में अपने होने वाले पति सोनभद्र को देखने की तीव्र इच्छा हुई। उन्होंने अपनी सबसे प्रिय और विश्वासपात्र सखी 'जुहिला' को अपना संदेश लेकर सोनभद्र के पास भेजा।

जुहिला जब सोनभद्र के पास पहुँची, तो राजकुमार सोनभद्र उसकी सुंदरता पर मोहित हो गए। नियति का खेल देखिए, जुहिला ने भी राजकुमारी के साथ विश्वासघात किया और खुद को राजकुमारी बताकर सोनभद्र के करीब आ गई। काफी समय बीत गया, जुहिला वापस नहीं आई। चिंतित नर्मदा स्वयं सोनभद्र से मिलने निकल पड़ीं।

जब वह सोनभद्र के महल पहुँची, तो वहाँ का दृश्य देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उनकी सबसे प्रिय सखी जुहिला और उनके होने वाले पति सोनभद्र एक-दूसरे में खोए हुए थे। प्रेम में मिले इस धोखे ने नर्मदा को भीतर तक तोड़ दिया। क्रोध और ग्लानि में उन्होंने उसी क्षण प्रण लिया कि वह अब कभी विवाह नहीं करेंगी और आजीवन कुंवारी रहेंगी।

उल्टी दिशा में बहने का संकल्प

नर्मदा उस स्थान से तुरंत मुड़ गईं और सोनभद्र से विपरीत दिशा में चल पड़ीं। कहा जाता है कि आज भी वह क्रोध और विरह की अग्नि में जलती हुई पश्चिम की ओर बहती हैं, जबकि सोनभद्र पूर्व की ओर बहते हैं। यह नदी हमें सिखाती है कि स्वाभिमान के आगे प्रेम भी छोटा पड़ जाता है।

नर्मदा का आध्यात्मिक महत्व: गंगा से भी पवित्र?

शास्त्रों में कहा गया है— "गंगे तव दर्शनात मुक्ति, नर्मदे तव स्मरणात् मुक्ति"। अर्थात गंगा में स्नान करने से पुण्य मिलता है, लेकिन नर्मदा के तो केवल दर्शन और स्मरण मात्र से ही मनुष्य के पाप धुल जाते हैं। यहाँ तक कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, स्वयं माँ गंगा हर साल एक काली गाय का रूप धरकर नर्मदा में स्नान करने आती हैं ताकि वह भी पवित्र हो सकें।

नर्मदा जयंती के दिन भक्त माँ को चुनरी चढ़ाते हैं और दीपदान करते हैं। इस दिन नर्मदा के तटों पर लाखों दीप जलाए जाते हैं, जो ऐसा लगता है मानो आकाश के तारे धरती पर उतर आए हों।

"नर्मदे सर्वदे देवी, सर्वपाप हरे शुभे।
त्वदीय पाद पंकजम्, नमामि देवी नर्मदे॥"

नर्मदे हर!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. नर्मदा जयंती 2026 में कब है?

नर्मदा जयंती 25 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी।

2. क्या नर्मदा नदी कुंवारी है?

हाँ, पौराणिक कथाओं के अनुसार नर्मदा ने सोनभद्र के विश्वासघात के बाद आजीवन कुंवारी रहने का संकल्प लिया था।

3. नर्मदा नदी का उद्गम स्थल कहाँ है?

नर्मदा नदी मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के अमरकंटक से निकलती है।

📘 Facebook ✖ X
🏷️ Topics:
Loading Amazing Content...
Vivek Hardaha

Vivek Hardaha

M.Sc. CS • M.A. Sociology • PGD Rural Dev.
Web Creator since 2014