ओशो ने मन को सबसे बड़ा दुश्मन क्यों कहा?
ओशो के विचार पढ़ते समय यह वाक्य बहुत चौंकाता है कि उन्होंने मन को सबसे बड़ा दुश्मन कहा। आम इंसान सोचता है — मन तो हमारा है, फिर वह दुश्मन कैसे हो सकता है? लेकिन ओशो का यह कथन गुस्से या नकारात्मकता से नहीं, बल्कि गहरी समझ से निकला हुआ है।
असल में ओशो मन के खिलाफ नहीं थे, बल्कि मन की बेहोशी के खिलाफ थे। जब मन बिना जागरूकता के चलता है, तभी वह समस्या बनता है।
ओशो के अनुसार मन क्या है?
ओशो के अनुसार मन कोई ठोस चीज़ नहीं है। मन विचारों, यादों, डर, इच्छाओं और भविष्य की कल्पनाओं का एक लगातार चलता हुआ सिलसिला है। यह हमेशा या तो अतीत में रहता है या भविष्य में।
यही कारण है कि मन कभी वर्तमान में नहीं होता। और जहाँ वर्तमान नहीं है, वहाँ शांति भी नहीं हो सकती।
मन दुश्मन कब बनता है?
मन तब दुश्मन बनता है जब हम उसके हर विचार को सच मान लेते हैं। बिना देखे, बिना समझे, हम उसके पीछे चलने लगते हैं।
ओशो कहते हैं — जब तुम मन को देखना शुरू करते हो, तब मन अपनी ताकत खो देता है। लेकिन जब तुम मन बन जाते हो, तब वही तुम्हें नियंत्रित करने लगता है।
क्या ओशो मन को खत्म करने को कहते हैं?
बिल्कुल नहीं। यह सबसे बड़ी गलतफहमी है। ओशो कभी नहीं कहते कि मन को मार दो या दबा दो। वे कहते हैं — मन को देखो।
देखने का मतलब है साक्षी भाव। जैसे कोई नदी बह रही हो और तुम किनारे बैठकर उसे देख रहे हो। न रोकना, न बदलना — बस देखना।
यही बात ध्यान से कैसे जुड़ती है?
अगर आपने ओशो के ध्यान वाले विचार पढ़े हैं, तो आपने यह जरूर समझा होगा कि ध्यान का मतलब मन को रोकना नहीं है। ध्यान का मतलब है जागरूक होना।
अगर आपने पहला आर्टिकल नहीं पढ़ा है, तो इसे जरूर पढ़ें: ओशो के अनुसार ध्यान क्या है? और आम आदमी इसे कैसे करे
ध्यान वही स्थिति है जहाँ मन चलता रहता है, लेकिन तुम उससे अलग खड़े हो जाते हो।
आम आदमी के लिए इसका मतलब क्या है?
आम इंसान दिन भर मन के आदेश पर चलता है — डर, चिंता, तुलना, गुस्सा। ओशो कहते हैं कि समस्या मन नहीं है, समस्या यह है कि हम उसमें पूरी तरह डूबे हुए हैं।
जब थोड़ी-सी दूरी बनती है, तब समझ आती है कि मन एक उपकरण है, मालिक नहीं।
मन दुश्मन नहीं, दर्पण है
ओशो का सबसे सुंदर संदेश यही है — मन तुम्हारा दुश्मन नहीं है, वह तुम्हें तुम्हारी बेहोशी दिखाता है।
जैसे ही तुम सजग होते हो, मन अपना प्रभुत्व खो देता है। इसलिए ओशो कहते हैं कि मन सबसे बड़ा दुश्मन लगता है, लेकिन असल में दुश्मन अजागरूकता है।
देखना सीखो, लड़ना नहीं — यही ओशो का सार है।
Mind repeats, awareness watches — save this poster to remember Osho’s insight.
Team vhoriginal.com | Spirituality Expert