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ओशो के अनुसार:

ओशो के अनुसार ध्यान क्या है? और आम आदमी इसे कैसे कर सकता है

ओशो के अनुसार ध्यान क्या है? और आम आदमी इसे कैसे कर सकता है

जब भी ध्यान की बात आती है, ज़्यादातर लोग सोचते हैं कि ध्यान कोई कठिन साधना है, जो सिर्फ संन्यासियों या साधुओं के लिए होती है। लेकिन ओशो के अनुसार ध्यान बिल्कुल अलग है। उनके लिए ध्यान कोई अभ्यास नहीं, बल्कि जीने की एक अवस्था है।

ओशो कहते हैं कि ध्यान करने की कोशिश करना ही सबसे बड़ी गलती है। जैसे नींद को लाया नहीं जाता, वैसे ही ध्यान भी किया नहीं जाता — वह अपने आप घटता है। जब मन शांत होता है, तब ध्यान अपने आप प्रकट होता है।

ओशो के अनुसार ध्यान का सही अर्थ

ओशो के शब्दों में, ध्यान का मतलब है — साक्षी भाव। यानी जो भी हो रहा है, उसे बिना जज किए देखना। न रोकना, न पकड़ना।

अगर विचार आ रहे हैं, तो उन्हें आने दो। अगर मन भटक रहा है, तो उसे भटकते हुए देखो। यही Osho meditation का मूल सिद्धांत है।

आम आदमी के लिए ध्यान मुश्किल क्यों लगता है?

आम इंसान ध्यान को कंट्रोल से जोड़ देता है। वह सोचता है कि ध्यान में दिमाग खाली होना चाहिए। लेकिन ओशो साफ कहते हैं — मन को खाली करने की कोशिश ही अशांति पैदा करती है।

असल समस्या यह नहीं है कि हमारे पास समय नहीं है, बल्कि यह है कि हम हर चीज़ को करने की कोशिश करते हैं, देखने की नहीं।

ओशो ध्यान कैसे शुरू करने को कहते हैं?

1. बैठने की ज़रूरत नहीं है
ओशो ध्यान को किसी आसन से नहीं जोड़ते। चलते हुए, नहाते हुए, चाय पीते हुए भी ध्यान संभव है — बस जागरूकता चाहिए।

2. मन से लड़ो मत
मन दुश्मन नहीं है। उसे देखो, समझो। जब तुम लड़ना छोड़ देते हो, मन अपने आप शांत होने लगता है।

3. सांस पर ज़ोर मत डालो
सांस को बदलने की कोशिश मत करो। बस महसूस करो कि सांस अंदर जा रही है, बाहर आ रही है। यही काफी है।

4. रोज़ थोड़ी देर जागरूक रहो
पूरे दिन ध्यान में रहने की ज़रूरत नहीं। दिन में 5–10 मिनट भी अगर पूरी तरह सचेत हो जाओ, तो वही ध्यान है।

ओशो ध्यान और आम जीवन

ओशो की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्होंने ध्यान को जीवन से अलग नहीं किया। उनके अनुसार, अगर ध्यान जीवन से अलग है, तो वह ध्यान नहीं, पलायन है।

ऑफिस में काम करते हुए, घर में बच्चों के साथ खेलते हुए, अकेले बैठे हुए — हर जगह ध्यान संभव है। यही कारण है कि आज भी लोग Osho meditation meaning in Hindi खोजते हैं।

एक ज़रूरी बात

ध्यान कोई लक्ष्य नहीं है जिसे पाना हो। ध्यान एक समझ है, जो धीरे-धीरे गहराती है। अगर आज कुछ महसूस न हो, तो भी ठीक है। देखने की आदत बनाइए, परिणाम अपने आप आएगा।

ओशो कहते हैं — जब तुम कुछ बनने की कोशिश छोड़ देते हो, तभी तुम वास्तव में हो जाते हो। यही ध्यान का सार है।


What is meditation according to Osho? — A visual explanation to save and reflect.

Team vhoriginal.com | Spirituality Expert

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