Shiv Kailasho Ke Wasi Lyrics in Hindi | शिव कैलाशों के वासी (धौली धौली धजा) - Hansraj Raghuwanshi

Shiv Kailasho Ke Wasi Lyrics: शिव कैलाशों के वासी (धौली धौली धजा)

जय भोले की! जय पहाड़ा वाले की! 🙏

जब आप पहाड़ों की यात्रा पर होते हैं, तो कानों में एक ही आवाज़ गूंजती है—"शिव कैलाशों के वासी, धौली धौली धजा तुम्हारी।"

हंसराज रघुवंशी (बाबा हंसराज) का यह भजन सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि पहाड़ों की ठंडी हवाओं और शिव भक्ति का एक अद्भुत संगम है। यह भजन भगवान शिव को 'कैलाश के राजा' के रूप में नमन करता है। इसकी धुन इतनी रूहानी है कि आँखें बंद करते ही इंसान खुद को कैलाश पर्वत के चरणों में महसूस करता है।

आज हम इस सुपरहिट भजन के पूरे लिरिक्स और इसमें इस्तेमाल हुए पहाड़ी शब्दों (जैसे धौली धजा) का अर्थ जानेंगे।


🎵 भजन जानकारी (Song Info) विवरण (Details)
भजन का नाम शिव कैलाशों के वासी (Shiv Kailasho Ke Wasi)
गायक (Singer) हंसराज रघुवंशी (Hansraj Raghuwanshi)
शैली (Genre) पहाड़ी फोक / शिव भजन
मुख्य आकर्षण धौली धौली धजा (White Flag)
Shiv Kailasho Ke Wasi Lyrics Image
शिव कैलाशों के वासी - धौली धजा तुम्हारी

🎵 शिव कैलाशों के वासी (सम्पूर्ण लिरिक्स) 🎵

(मुखड़ा)

शिव कैलाशों के वासी
धौली धौली धजा तुम्हारी
शिव कैलाशों के वासी
धौली धौली धजा तुम्हारी...
फिर से बोलो...
शिव कैलाशों के वासी, धौली धौली धजा तुम्हारी।


(अंतरा १: रूप वर्णन)

सांप खेले तेरे गले, बिच्छू खेले तेरे कान
सांप खेले तेरे गले, बिच्छू खेले तेरे कान।
लोटा भांग वाला पीते, पीते हो तुम रौद्र रूप
भोले नाथ अमली...
शिव कैलाशों के वासी, धौली धौली धजा तुम्हारी।


(अंतरा २: अलख निरंजन)

जंगल जंगल ढूँढा तुझे, पर्वत पर्वत ढूँढा
जंगल जंगल ढूँढा तुझे, पर्वत पर्वत ढूँढा।
कण-कण में है वास तुम्हारा, अलख निरंजन स्वामी
भोले नाथ अमली...
शिव कैलाशों के वासी, धौली धौली धजा तुम्हारी


(अंतरा ३: नंदी सवारी)

नंदी की सवारी करते, गले में नाग विराजत
नंदी की सवारी करते, गले में नाग विराजत।
हाथ त्रिशूल और डमरू साजे, भक्त करें जयकारा
भोले नाथ अमली...
शिव कैलाशों के वासी, धौली धौली धजा तुम्हारी।


(जयकारा: जय बाबा बर्फानी!)


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पहाड़ी और शिव भक्तों के लिए स्टेटस लाइन्स:

"शिव कैलाशों के वासी, धौली धौली धजा तुम्हारी 🏔️🚩"

"कण-कण में है वास तुम्हारा, अलख निरंजन स्वामी 🙏"


📜 'धौली धजा' और 'कैलाश वासी' का अर्थ (Meaning)

इस भजन में कुछ पहाड़ी शब्द और गहरे प्रतीक हैं। आइए उनका मतलब समझते हैं:

1. "धौली धौली धजा तुम्हारी" (Dhauli Dhauli Dhaja)

अर्थ: 'धौली' (Dhauli) का अर्थ होता है सफेद (White) या उज्ज्वल। 'धजा' का मतलब है पताका (Flag)।

यहाँ कवि कह रहा है कि कैलाश पर्वत जो हमेशा बर्फ से ढका रहता है, वह दूर से ऐसा लगता है जैसे शिव जी की सफेद पताका (White Flag) लहरा रही हो। यह शांति और पवित्रता का प्रतीक है। शिव जी का रंग भी 'कर्पूर गौरं' (कपूर जैसा सफेद) है।

2. "शिव कैलाशों के वासी" (Kailasho Ke Wasi)

अर्थ: शिव जी महलों में नहीं रहते। वे दुनिया के सबसे ऊंचे और कठिन स्थान 'कैलाश' पर निवास करते हैं। यह बताता है कि भगवान वहां मिलते हैं जहाँ सन्नाटा और एकांत होता है, भीड़-भाड़ में नहीं।

3. "अलख निरंजन" (Alakh Niranjan)

अर्थ: 'अलख' मतलब जो दिखाई न दे, और 'निरंजन' मतलब जो माया से रहित हो (बेदाग)। शिव जी निराकार हैं, उनका कोई रूप नहीं है, वे बस एक अहसास हैं जो कण-कण में बसा है।


💡 विवेक भाई की सलाह (पहाड़ और पूजा)

दोस्तों, मैं (विवेक) भी पहाड़ों का बहुत बड़ा प्रेमी हूँ। जब आप पहाड़ों में होते हैं, तो वहां की हवा में ही 'शिव' महसूस होते हैं।

लेकिन अगर आप अभी शहर में हैं, तो क्या करें?

मन को कैलाश बनाएं। शिव जी सिर्फ पहाड़ों पर नहीं, आपके मोबाइल स्क्रीन पर भी विराजते हैं। अगर आप मंदिर नहीं जा सकते, तो निराश न हों।

📱 अभी 2 मिनट की ऑनलाइन पूजा करें

एक क्लिक में शिवलिंग पर फूल चढ़ाएं, दीप जलाएं और 'धौली धजा' को नमन करें।


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(कैलाश आपके भीतर है।)

❓ भजन से जुड़े सवाल (FAQ)

Q1. 'धौली' शब्द का मतलब क्या है?

धौली (Dhauli) एक पहाड़ी/हिंदी शब्द है जिसका अर्थ होता है 'सफेद' (White)। यह बर्फ की सफेदी को दर्शाता है।

Q2. इस भजन को किसने लिखा और गाया है?

इस भजन को लिखा और गाया प्रसिद्ध गायक हंसराज रघुवंशी (बाबा हंसराज) ने है।

अगर आपको यह भजन पसंद आया, तो इसे अपने पहाड़ी और शिव भक्त दोस्तों के साथ शेयर करें।

🚩 जय बाबा बर्फानी! हर हर महादेव! 🚩

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Vivek Hardaha

Vivek Hardaha

M.Sc. CS • M.A. Sociology • PGD Rural Dev.
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