Nagar Mein Jogi Aaya Lyrics in Hindi | नगर में जोगी आया (लिरिक्स और अर्थ)

Nagar Mein Jogi Aaya Lyrics in Hindi: नगर में जोगी आया (पूरे लिरिक्स और अर्थ)

अलख निरंजन! हर हर महादेव! 🙏

भगवान शिव को 'छलिया' भी कहा जाता है, क्योंकि वे अक्सर अपने भक्तों की परीक्षा लेने के लिए अलग-अलग भेष बदलकर पृथ्वी पर आते हैं। "नगर में जोगी आया" (Nagar Mein Jogi Aaya) एक ऐसा ही प्रसिद्ध लोक-भजन है जो शिव जी के 'जोगी' (भिक्षुक) रूप का वर्णन करता है।

जब यह भजन बजता है, तो एक अजीब सी सिहरन और भक्ति का भाव जाग उठता है। यह हमें याद दिलाता है कि ईश्वर किसी भी रूप में हमारे दरवाजे पर आ सकता है। आज हम इस सुपरहिट भजन के लिरिक्स और इसके गहरे अर्थ को जानेंगे।


Nagar Mein Jogi Aaya Lyrics Hindi Image
नगर में जोगी आया - शिव जी का अद्भुत रूप

🎵 नगर में जोगी आया (सम्पूर्ण लिरिक्स) 🎵

(मुखड़ा)

नगर में जोगी आया, नगर में जोगी आया
भेद कोई समझ ना पाया...
नगर में जोगी आया, भेद कोई समझ ना पाया
एक हाथ में डमरू साजे, दूजे हाथ में प्याला
शिव शंकर भोला भाला, शिव शंकर भोला भाला...


(अंतरा १)

कानों में कुंडल साजे, गल में विषधर काला
चंदा को माथे पे सजाया, ओढ़े मृग की छाला।
अंग भभूत रमाये है वो, डमरू वाला
भेद कोई समझ ना पाया...
नगर में जोगी आया, नगर में जोगी आया...


(अंतरा २)

अलख निरंजन, सब दुख भंजन, ऐसा रूप बनाया
भिक्षा मांगने, नगर नगर में, अलख जगाने आया।
सब से बड़ा है तेरा नाम, ओ भोले नाथा
भेद कोई समझ ना पाया...
नगर में जोगी आया, नगर में जोगी आया...


(अंतरा ३)

पार्वती संग ब्याह रचाने, ऐसा जोगी आया
देख के जिसकी सूरत को, हर कोई घबराया।
वो तो है गौरा का मतवाला, ओ भोले भाला
भेद कोई समझ ना पाया...
नगर में जोगी आया, नगर में जोगी आया...


(जयकारा: बोल सांचे दरबार की जय!)


📜 भजन का भावार्थ और रहस्य (Meaning)

इस भजन की हर पंक्ति में एक गहरा संदेश छिपा है। यह सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि शिव के 'अघोरी' रूप का दर्शन है।

1. "भेद कोई समझ ना पाया"

अर्थ: भगवान शिव मायातीत हैं। वे कब, किस रूप में और क्यों आते हैं, यह कोई साधारण मनुष्य नहीं समझ सकता। वे भिखारी के रूप में आते हैं, लेकिन असल में वे तीनों लोकों के स्वामी हैं। यह पंक्ति हमें सिखाती है कि बाहरी रूप-रंग से किसी की शक्ति को नहीं आंकना चाहिए।

2. "भिक्षा मांगने, नगर नगर में, अलख जगाने आया"

अर्थ: शिव जी को भिक्षा की क्या जरूरत? वे तो भंडारी हैं। वे भिक्षा इसलिए मांगते हैं ताकि वे हमारे अहंकार (Ego) को भिक्षा के रूप में ले सकें और बदले में हमें ज्ञान और मोक्ष दे सकें। 'अलख जगाना' मतलब सोई हुई आत्मा को जगाना।

3. "देख के जिसकी सूरत को, हर कोई घबराया"

अर्थ: यह पंक्ति शिव-विवाह के समय की है। जब शिव जी बारात लेकर आए, तो वे भस्म लगाए हुए, सांप लपेटे हुए, अघोरी रूप में थे। उन्हें देखकर लोग डर गए। यह बताता है कि शिव सत्य हैं, और सत्य कभी-कभी डरावना लग सकता है, लेकिन वही शाश्वत है।


🤔 जोगी रूप से क्या सीखें? (Life Lessons)

महादेव का यह जोगी रूप हमारे जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण सबक देता है:

1. वैराग्य (Detachment)

दुनिया का मालिक होकर भी शिव जी एक फकीर की तरह रहते हैं। यह सिखाता है कि चीजों का मालिक होना गलत नहीं है, लेकिन चीजों का गुलाम होना गलत है।

2. समदृष्टि (Equality)

जोगी किसी के महल में भी जा सकता है और किसी की झोपड़ी में भी। शिव जी के लिए राजा और रंक दोनों एक समान हैं।


💡 विवेक भाई की सलाह (भक्ति में शक्ति)

दोस्तों, मैं (विवेक) मानता हूँ कि जब हम यह भजन सुनते हैं, तो हमें भी कुछ देर के लिए 'जोगी' बन जाना चाहिए। मतलब, दुनिया की चिंताओं को भूलकर सिर्फ शिव के ध्यान में मग्न हो जाना चाहिए।

लेकिन क्या आप जानते हैं? आप भजन सुनते-सुनते अपने मोबाइल पर ही शिव जी को फूल भी चढ़ा सकते हैं।

📱 भजन के साथ करें डिजिटल पूजा

मंदिर जाने का समय नहीं है? कोई बात नहीं।

हमने आपके लिए एक विशेष "डिजिटल पूजा टूल" बनाया है। यहाँ आप बटन दबाकर शिवलिंग पर फूल अर्पित कर सकते हैं और दीप जला सकते हैं।


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(सच्ची श्रद्धा ही सबसे बड़ी पूजा है।)

❓ भजन से जुड़े सवाल (FAQ)

Q1. "नगर में जोगी आया" भजन का मूल अर्थ क्या है?

इसका मूल अर्थ है कि ईश्वर किसी भी रूप में आ सकते हैं। शिव जी ने जोगी का रूप धरकर यह संदेश दिया कि वे महलों के नहीं, बल्कि भक्ति के भूखे हैं।

Q2. इस भजन को किसने प्रसिद्ध किया?

वैसे तो यह एक पारंपरिक लोक भजन है, लेकिन आधुनिक समय में इसे हंसराज रघुवंशी, पूनम गोंड और अन्य कलाकारों ने बहुत प्रसिद्ध किया है।

अगर आपको यह भजन पसंद है, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर जरूर करें।

🚩 अलख निरंजन! जय शिव शंकर! 🚩

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Vivek Hardaha

Vivek Hardaha

M.Sc. CS • M.A. Sociology • PGD Rural Dev.
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