माँ नर्मदा पुराण कथा: उत्पत्ति, महिमा और परिक्रमा का रहस्य (सम्पूर्ण जानकारी)

शिव पुत्री मां नर्मदा

नर्मदे हर! भारत भूमि पर नदियाँ केवल जल का स्रोत नहीं हैं, बल्कि वे साक्षात् देवियां हैं। इनमें माँ नर्मदा का स्थान सबसे विशिष्ट है। आज हम विस्तार से जानेंगे माँ नर्मदा पुराण कथा (Maa Narmada Puran Katha), उनकी उत्पत्ति का रहस्य और क्यों उन्हें मोक्षदायिनी कहा जाता है।

पुराणों में कहा गया है कि गंगा, यमुना और सरस्वती का जल पवित्र है, लेकिन नर्मदा जी का तो केवल 'दर्शन' ही मनुष्य को पाप मुक्त करने के लिए पर्याप्त है। यह विश्व की एकमात्र ऐसी नदी है जिसकी परिक्रमा की जाती है। आइए, इस दिव्य यात्रा पर चलते हैं।

माँ नर्मदा का जन्म कैसे हुआ? (उत्पत्ति की कथा)

नर्मदा पुराण और स्कंद पुराण के रेवा खंड में माँ नर्मदा की उत्पत्ति की एक बहुत ही सुंदर कथा मिलती है।

प्राचीन काल में, विंध्याचल और सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच स्थित मैकल पर्वत (वर्तमान अमरकंटक) पर भगवान शिव घोर तपस्या में लीन थे। उनकी तपस्या इतनी तीव्र थी कि उनके शरीर से पसीने की बूंदें (स्वेद) निकलने लगीं। जब ये दिव्य बूंदें मैकल पर्वत के कुंड में गिरीं, तो उनसे एक अत्यंत तेजस्वी और रूपवान कन्या का प्राकट्य हुआ।

'नर्मदा' नाम का अर्थ

उस कन्या के अलौकिक सौंदर्य और चंचलता को देखकर भगवान शिव और अन्य देवता अति प्रसन्न हुए। उस कन्या ने अपने कल-कल स्वर से वातावरण को आनंदित कर दिया। तब भगवान शिव ने कहा— "हे देवी! तुमने हमारे मन को 'नर्म' (आनंद) दिया है, इसलिए आज से तुम्हारा नाम 'नर्मदा' होगा।"

चूँकि उनका जन्म शिवजी के पसीने (शरीर) से हुआ, इसलिए उन्हें 'शिवसुता' और 'शिवपुत्री' भी कहा जाता है। आप माँ के उद्गम स्थल के बारे में विस्तार से यहाँ पढ़ सकते हैं: Maa Narmada Ji Ka Udgam Sthal Amarkantak Kaise Jayen.

नर्मदा पुराण की प्रमुख बातें और महिमा

नर्मदा जी की महिमा का वर्णन शब्दों में करना असंभव है, लेकिन पुराणों में कुछ ऐसे तथ्य दिए गए हैं जो उन्हें गंगा जी से भी विशिष्ट बनाते हैं:

1. गंगा स्नान, नर्मदा दर्शन

शास्त्रों में एक बहुत प्रसिद्ध श्लोक है:

"गंगा कनखले पुण्या, कुरुक्षेत्रे सरस्वती।
ग्रामे वा यदि वारण्ये, पुण्या सर्वत्र नर्मदा॥"

अर्थात, गंगा कनखल (हरिद्वार) में पवित्र हैं, सरस्वती कुरुक्षेत्र में, लेकिन नर्मदा जी गाँव हो या जंगल, सर्वत्र पवित्र हैं। माना जाता है कि गंगा में स्नान करने से जो पुण्य मिलता है, वह माँ नर्मदा के दर्शन मात्र से प्राप्त हो जाता है।

2. हर कंकर शंकर (Narmadeshwar)

नर्मदा ही एकमात्र ऐसी नदी है जिसके हर पत्थर में भगवान शिव का वास माना जाता है। नर्मदा से निकले पत्थरों को 'प्राण प्रतिष्ठा' की आवश्यकता नहीं होती। वे स्वयं सिद्ध 'नर्मदेश्वर शिवलिंग' होते हैं। भक्त इन्हें सीधे अपने घर के मंदिर में स्थापित कर सकते हैं।

3. प्रलय में भी अमर

पुराण कहते हैं कि जब महाप्रलय आता है और सारी सृष्टि नष्ट हो जाती है, तब भी माँ नर्मदा सुरक्षित रहती हैं। इसी अमरता के कारण इनका एक नाम 'अमरकन्या' भी है।

भक्ति रस: माँ नर्मदा की स्तुति और भजन गाकर ही उनकी कृपा पाई जा सकती है। यहाँ पढ़ें Best Narmada Ji Ke Bhajan Lyrics और भक्ति में खो जाएं।

नर्मदा परिक्रमा: मोक्ष का मार्ग

नर्मदा जी की परिक्रमा (Narmada Parikrama) विश्व की सबसे बड़ी आध्यात्मिक यात्राओं में से एक है। भक्त नंगे पैर अमरकंटक से लेकर समुद्र संगम (भरूच) तक एक तट से जाते हैं और दूसरे तट से वापस आते हैं।

  • यह परिक्रमा लगभग 3,500 किलोमीटर की होती है।
  • मान्यता है कि परिक्रमा करने वाले व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं।
  • परिक्रमा के दौरान भक्त एक-दूसरे का अभिवादन Narmade Har कहकर करते हैं, जिसका अर्थ है "नर्मदा ही हर (शिव) हैं"।

नर्मदा तट के प्रमुख तीर्थ और ऋषि आश्रम

माँ रेवा के दोनों तटों पर अनेकों तीर्थ और ऋषियों के तपस्थल हैं।

  1. ओंकारेश्वर: यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है जो नर्मदा तट पर स्थित है।
  2. महेश्वर: जिसे अहिल्याबाई होल्कर ने बसाया, यह घाटों की नगरी है।
  3. भृगु और कपिल आश्रम: भृगु ऋषि, कपिल मुनि और मार्कण्डेय ऋषि जैसे महान तपस्वियों ने नर्मदा तट पर ही तपस्या करके सिद्धियाँ प्राप्त की थीं।

अगर आप नर्मदा जी की पूजा विधि जानना चाहते हैं, तो यह लेख जरूर पढ़ें: Maa Narmada Ki Puja Kaise Karen.

माँ नर्मदा की अन्य नाम और उनके अर्थ

  • रेवा: अपने तेज प्रवाह और चट्टानों से कूदने के कारण (रेवा का अर्थ है कूदने वाली)।
  • पापमोचनी: पापों का नाश करने वाली।
  • जीवनदायिनी: मप्र और गुजरात की जीवनरेखा।

सावधान! क्या हम 'शिवपुत्री' का सम्मान कर रहे हैं?

लेख के अंत में एक कड़वा सच जानना जरुरी है। जिस नर्मदा को हम 'माँ' और 'शिवपुत्री' कहते हैं, पुराणों में जिसकी इतनी महिमा है, आज हम उसे ही मैला कर रहे हैं।

प्लास्टिक की थैलियां, डिस्पोजल गिलास, पुराने कपड़े और रसायनों से भरा पूजा का सामान नदी में फेंककर हम पुण्य नहीं, बल्कि पाप के भागी बन रहे हैं। नर्मदा पुराण कहीं भी यह नहीं कहता कि नदी को गंदा करो।

सच्ची भक्ति स्वच्छता में है। अगर आप जानना चाहते हैं कि सही मायने में माँ को क्या अर्पित करना चाहिए, तो पढ़ें: Narmada Ji Ko Kya Chadhana Chahie। याद रखें, साफ नर्मदा ही हमारे कल का आधार है।

FAQ: नर्मदा पुराण से जुड़े प्रश्न

नर्मदा नदी का जन्म किसकी तपस्या से हुआ?

भगवान शिव की घोर तपस्या के दौरान उनके शरीर से निकले पसीने (स्वेद) से मैकल पर्वत पर माँ नर्मदा का जन्म हुआ।

नर्मदा को कुंवारी नदी क्यों कहा जाता है?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, नर्मदा जी ने आजीवन अविवाहित रहकर विपरीत दिशा में बहने का निर्णय लिया था, इसलिए उन्हें कुंवारी नदी के रूप में पूजा जाता है।

नर्मदेश्वर शिवलिंग क्या है?

नर्मदा नदी से निकलने वाले हर पत्थर को नर्मदेश्वर शिवलिंग माना जाता है। इन्हें प्राण-प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती और ये स्वयंभू शिव माने जाते हैं।

✍️ Author: VH Original
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Vivek Hardaha

Vivek Hardaha

M.Sc. CS • M.A. Sociology • PGD Rural Dev.
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