ओशो के अनुसार डर और चिंता क्यों पैदा होती है?
डर और चिंता आज के समय में लगभग हर इंसान की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। कोई भविष्य को लेकर डरता है, कोई रिश्तों को लेकर, तो कोई अपने ही मन से परेशान रहता है। ओशो के अनुसार डर और चिंता कोई बाहरी समस्या नहीं हैं, बल्कि यह हमारे मन की ही बनाई हुई अवस्थाएँ हैं।
ओशो कहते हैं कि डर हमेशा भविष्य से जुड़ा होता है। जहाँ भविष्य है, वहीं चिंता है। और जहाँ वर्तमान है, वहाँ न डर है न चिंता।
ओशो के अनुसार डर की जड़ क्या है?
ओशो के अनुसार, डर का जन्म कल्पना से होता है। जो अभी हुआ ही नहीं, जो शायद कभी होगा भी नहीं — मन उसी को सोचकर डर पैदा कर लेता है।
मन लगातार कहानियाँ बनाता रहता है। “अगर ऐसा हो गया तो?”, “अगर वैसा हो गया तो?” — यही प्रश्न डर को जन्म देते हैं।
चिंता डर से अलग कैसे है?
ओशो बताते हैं कि डर अचानक आता है, जबकि चिंता लगातार बनी रहती है। चिंता डर का ही लंबा रूप है।
जब इंसान भविष्य में जीने लगता है, तब चिंता उसकी आदत बन जाती है। वर्तमान में जीने वाला व्यक्ति चिंतित नहीं हो सकता।
मन और डर का रिश्ता
ओशो के अनुसार, मन का काम ही है भविष्य और अतीत में घूमना। इसलिए जब इंसान पूरी तरह मन के साथ जुड़ जाता है, तब डर और चिंता अपने आप आ जाते हैं।
इसी संदर्भ में ओशो ने मन को सबसे बड़ा दुश्मन कहा। अगर आपने वह लेख नहीं पढ़ा है, तो ज़रूर पढ़ें:
ओशो ने मन को सबसे बड़ा दुश्मन क्यों कहा?
मन दुश्मन इसलिए लगता है क्योंकि वह हमें वर्तमान से दूर ले जाता है।
ध्यान डर और चिंता को कैसे कम करता है?
ओशो के अनुसार, डर और चिंता से लड़ने की ज़रूरत नहीं है। उन्हें समझने की ज़रूरत है। यही समझ ध्यान से आती है।
ध्यान का मतलब मन को रोकना नहीं, बल्कि मन को देखना है। जब इंसान साक्षी बन जाता है, तब डर अपने आप कम होने लगता है।
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ओशो के अनुसार ध्यान क्या है? और आम आदमी इसे कैसे करे
डर, चिंता और प्रेम
ओशो कहते हैं कि जहाँ प्रेम है, वहाँ डर नहीं टिक सकता। डर हमेशा असुरक्षा से पैदा होता है।
जब इंसान भीतर से खाली होता है, तभी वह डरता है। प्रेम वह अवस्था है जहाँ इंसान अपने आप में पूरा होता है।
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आम आदमी के लिए ओशो का सरल समाधान
ओशो कहते हैं — डर और चिंता को मिटाने के लिए भविष्य को छोड़ना होगा। इसका मतलब यह नहीं कि ज़िम्मेदारी छोड़ दो, बल्कि इसका मतलब है कि मानसिक रूप से अभी में रहो।
जब भी डर या चिंता आए, बस इतना देखो कि यह अभी हो रहा है या सिर्फ मन की कहानी है। यह देखने भर से ही उसका असर कम हो जाता है।
डर कोई समस्या नहीं, संकेत है
ओशो के अनुसार, डर और चिंता यह बताते हैं कि इंसान मन में ज़्यादा जी रहा है और जागरूकता में कम।
जैसे-जैसे जागरूकता बढ़ती है, डर और चिंता अपने आप कम होते जाते हैं। उन्हें हटाने की कोशिश मत करो, उन्हें समझो।
ओशो का संदेश साफ है — जहाँ जागरूकता है, वहाँ डर नहीं टिकता।
Fear lives in the future — awareness brings peace. Save this poster.
Team vhoriginal.com | Spirituality Expert