होली फाग गीत लिरिक्स: टॉप 3 मशहूर बुंदेली और अवधी फगुआ (Holi Phagua)

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होली फाग गीत लिरिक्स: टॉप 3 मशहूर बुंदेली और अवधी फगुआ (Holi Phagua)

होली का पर्व भारत के हर हिस्से में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है, लेकिन बुंदेलखंड की 'राई' और अवध के 'फगुआ' की बात ही कुछ और है। बुंदेली फाग की तेज थाप और मंजीरे की झंकार जब कानों में पड़ती है, तो हर कोई झूमने पर मजबूर हो जाता है। वहीं दूसरी ओर, अवध की होली में भगवान राम और माता सीता के प्रेम का बहुत ही सौम्य और मीठा वर्णन मिलता है।

आजकल लोग डीजे (DJ) के शोर में इन पुरानी लोक-परंपराओं को भूलते जा रहे हैं। कई लोग ऐसे हैं जो होली की चौपाल पर बैठकर पुराने गीत गाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें बुंदेली और अवधी फाग के पूरे बोल (Lyrics) याद नहीं होते। अगर आप भी इंटरनेट पर इन लोकगीतों के सही लिरिक्स खोज रहे हैं, तो हम आपके लिए टॉप 3 सबसे मशहूर बुंदेली और अवधी फगुआ लेकर आए हैं, जिन्हें आप ढोलक पर आसानी से गा सकते हैं।

इन गीतों को शुरू करने से पहले, अगर आप ठेठ ब्रज और देहात के अन्य गीतों के शौकीन हैं, तो आप हमारे टॉप 3 पारंपरिक और देहाती फाग गीत भी पढ़ सकते हैं।

होली में बुंदेली और अवधी गीतों का महत्व

बुंदेलखंड में ईसुरी की फाग सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है, जिसमें चार लाइनों (चौकड़िया) में गहरी बात कह दी जाती है। यहाँ की होली में रंग कम और मिट्टी-गारे का प्रयोग ज्यादा होता था, जो अब गुलाल में बदल गया है। वहीं अवध में फगुआ गाने की परंपरा है, जिसमें मुख्य रूप से रामजी और सीताजी की होली का वर्णन होता है। इन गीतों को गाने से न केवल त्योहार का आनंद दोगुना होता है, बल्कि हमारी पीढ़ियां अपनी माटी से भी जुड़ी रहती हैं।

होली के इस पावन अवसर पर बुराई का अंत और प्रेम की शुरुआत होती है। रंग खेलने के साथ-साथ यह भी जानना जरूरी है कि हम अपने जीवन से नकारात्मकता कैसे निकालें। आप होली में अपनी बुराइयों को कैसे जलाएं, यह विचार कर सकते हैं ताकि यह पर्व आपके जीवन में नया उजाला लेकर आए।

1. अवधी फगुआ: "आजु अवधपुरी में होरी"

अवध के देहाती इलाकों में भगवान राम और सीता माता को केंद्र में रखकर यह फगुआ बहुत ही भक्ति भाव और जोश के साथ गाया जाता है। इसकी लय बहुत ही मधुर होती है और इसे ढोलक-झाल के साथ समूह में गाया जाता है। इसके पूरे लिरिक्स यहाँ दिए गए हैं:

आजु अवधपुरी में होरी, खेलत राम लला।
रंग अबीर गुलाल उड़ावत, सखा सहेली मिली गोरी॥
आजु अवधपुरी में होरी...

कंचन थार अबीर भरि राखे,
भरि-भरि मारत पिचकारी।
आजु अवधपुरी में होरी...

सिया राम की जोरी सोहे,
लछमन भरत सखा भारी।
आजु अवधपुरी में होरी...

केसर रंग में भींजि रही सब,
अवध नगरिया की छोरी।
आजु अवधपुरी में होरी...

सुर नर मुनि सब कौतुक देखें,
बरसत सुमन सुहावन होरी।
आजु अवधपुरी में होरी...

यह फगुआ गाते समय 'जोगीरा सारा रा रा' का पुट भी जोड़ा जाता है। अवध की होली शालीनता और भक्ति का प्रतीक है। होली खेलने के बाद अक्सर लोग रंगों से भरे हुए घर लौटते हैं। अगर आप पक्के रंगों का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो ध्यान रखें कि होली का रंग कैसे साफ करें, ताकि अगले दिन आपको कोई परेशानी न हो।

2. प्रसिद्ध बुंदेली फाग: "मोरी चुनरी में डार दियो रंग"

बुंदेलखंड की होली अपनी तेज रफ़्तार और ढोलक-मंजीरे की जोड़ी के लिए जानी जाती है। बुंदेली फाग में अक्सर राधा-कृष्ण या देवर-भाभी की रंग भरी छेड़छाड़ का वर्णन होता है। जब चौपाल पर यह फाग शुरू होता है, तो गाने वालों की आवाज और सुनने वालों का उत्साह देखने लायक होता है। अगर आप बुंदेली फाग गाने की सोच रहे हैं, तो इसके लिखित बोल यहाँ हैं:

मोरी चुनरी में डार दियो रंग,
रंग डार दियो अलबेलन ने।
होरी खेलन आए नंद लाल,
मोरी चुनरी में डार दियो रंग...

कोरे कोरे कलसा में रंग घोरयो है,
भर भर मारत पिचकारी रे संग।
रंग डार दियो अलबेलन ने...

अलबेलन ने, मतवारन ने,
ग्वाल बाल सब आए सखा संग।
रंग डार दियो अलबेलन ने...

लाल गुलाबी अबीर उड़ावत,
राधा गोरी के भालन पे।
मोरी चुनरी में डार दियो रंग...

बुंदेलखंड में फाग के साथ राई नृत्य का भी बहुत महत्व है। इस उत्साह और उमंग के बीच, यह त्योहार हमें धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की भी याद दिलाता है। होलिका दहन के समय गाए जाने वाले इन लोकगीतों के बीच होली में भक्त प्रह्लाद की इन 5 बातों को जरूर याद करना चाहिए, जो हमें जीवन में सच्चाई और अडिग विश्वास का पाठ पढ़ाती हैं।

3. पारंपरिक अवधी फगुआ: "सिया संग खेलत राम होरी"

अवध की होली का दूसरा सबसे खूबसूरत रूप है राम और माता सीता की होली। यह गीत बहुत ही शांत लेकिन गहरी भक्ति से भरा होता है। इसे अक्सर महिलाएं फाल्गुन के दिनों में अपने घरों के आंगनों में ढोलक पर गाती हैं। इसके पूरे बोल नीचे दिए गए हैं, जिन्हें आप अपनी डायरी में नोट कर सकते हैं:

सिया संग खेलत राम होरी,
होरी खेलत अवध बिहारी॥
सिया संग खेलत राम होरी...

राम के हाथ कनक पिचकारी,
सिया हाथ अबीर झोरी।
सिया संग खेलत राम होरी...

इत से राम रंग छिरकावत,
उत से सिया रंग गोरी।
सिया संग खेलत राम होरी...

सब सखियां मिली मंगल गावत,
रंग भींजी भई सारी।
सिया संग खेलत राम होरी...

झाल मंजीरा ढोलक बाजे,
छाई अवध में खुमारी।
सिया संग खेलत राम होरी...

यह फगुआ मन को असीम शांति देता है। अक्सर लोग सवाल करते हैं कि इस पावन दिन की शुरुआत कैसे करें, इसलिए त्योहार की सही विधि जानने के लिए यह जरूर पढ़ें कि होली में क्या करना चाहिए। सही तरीके से मनाई गई होली जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाती है।

निष्कर्ष

भारत की असली आत्मा गांवों और लोकगीतों में बसती है। ये बुंदेली और अवधी फाग गीत हमारी धरोहर हैं जिन्हें इंटरनेट और डीजे के जमाने में बचाकर रखना हम सब की जिम्मेदारी है। इस बार होली की महफिल में इन गीतों को जरूर शामिल करें और अपनी माटी की खुशबू को महसूस करें।

अगर आप अपनों से दूर हैं और उन्हें फाल्गुन की बधाई देना चाहते हैं, तो व्हाट्सएप और फेसबुक पर शेयर करने के लिए होली के बेस्ट मोबाइल वॉलपेपर और स्टेटस डाउनलोड करें और सभी को डिजिटल रूप से रंगें।

नोट: ऊपर दिए गए फाग और फगुआ गीत पारंपरिक लोकगीत हैं और इन्हें इंटरनेट के विभिन्न स्रोतों से कलेक्ट किया गया है।

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Vivek Hardaha

Vivek Hardaha

M.Sc. CS • M.A. Sociology • PGD Rural Dev.
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