ओशो महापरिनिर्वाण दिवस: "मृत्यु अंत नहीं, उत्सव है" (19 जनवरी)
19 जनवरी 1990 को ओशो ने अपना शरीर त्यागा था। दुनिया इसे 'पुण्यतिथि' कहती है, लेकिन ओशो के प्रेमी इसे 'महापरिनिर्वाण दिवस' के रूप में मनाते हैं। ओशो का कहना था कि जीवन एक सराय है और मृत्यु उस सराय से निकलकर अपने असली घर जाने का नाम है।
"उत्सव मेरे जीवन का धर्म है। हंसो, नाचो और गाओ... ताकि जब मौत आए, तो तुम उसे भी एक उत्सव की तरह गले लगा सको।"
आज की ओशो वाणी (Daily Insight)
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"जिस दिन तुम अपनी हंसी के मालिक बन जाओगे, उस दिन दुनिया की कोई भी ताकत तुम्हें रुला नहीं पाएगी।"
ओशो के 5 अनमोल विचार (Status के लिए)
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- प्रेम पर: "प्रेम कोई बंधन नहीं है, प्रेम तो मुक्ति है। जो तुम्हें बांधे, वो प्रेम नहीं हो सकता।"
- ध्यान पर: "ध्यान का अर्थ है - अपने भीतर की शांति को ढूंढना, जो हमेशा से वहां मौजूद है।"
- मृत्यु पर: "मृत्यु से डरो मत। यह तो बस पुराने वस्त्र त्याग कर नए वस्त्र धारण करने जैसा है।"
- जीवन पर: "भविष्य की चिंता मत करो, अतीत का पछतावा मत करो। जो है, बस यही पल है।"
- खुशी पर: "गंभीरता एक बीमारी है। जीवन को खेल की तरह जियो।"
ओशो की समाधि पर क्या लिखा है?
पुणे स्थित ओशो आश्रम में उनकी समाधि पर ये लाइनें लिखी हैं, जो उनके पूरे दर्शन को बयां करती हैं:
OSHO
Never Born
Never Died
Only Visited this Planet Earth between
Dec 11 1931 – Jan 19 1990
Never Born
Never Died
Only Visited this Planet Earth between
Dec 11 1931 – Jan 19 1990
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