राधा-कृष्ण के ब्रज फाग और भजनों का अनोखा उल्लास
भारत में होली का नाम लेते ही सबसे पहले जो तस्वीर मन में उभरती है, वह है मथुरा, वृंदावन, गोकुल और बरसाने की होली। ब्रज की होली केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी के अलौकिक प्रेम का प्रतीक है। वसंत पंचमी के दिन से ही पूरे ब्रज मंडल में गुलाल उड़ने लगता है और मंदिरों में फाग भजनों की शुरुआत हो जाती है। देश-विदेश से लोग ब्रज की इस पारंपरिक होली को देखने और ढोलक की थाप पर फाग गाने आते हैं।
आजकल इंटरनेट पर लोग सबसे ज्यादा राधा-कृष्ण के उन पारंपरिक भजनों और फाग गीतों के बोल (Lyrics) खोजते हैं, जिन्हें गाकर वे अपने घर में भी वृंदावन जैसा माहौल बना सकें। अगर आप भी फाल्गुन के इस पावन महीने में अपनी कीर्तन मंडली या परिवार के साथ ब्रज के रसिया और फाग गाना चाहते हैं, तो हम आपके लिए सबसे ज्यादा खोजे जाने वाले टॉप 3 फाग गीतों के पूरे लिरिक्स लेकर आए हैं।
ब्रज के इन भजनों को पढ़ने से पहले, अगर आप भारत के अन्य देहाती लोकगीतों में भी रुचि रखते हैं, तो हमारे टॉप 3 मशहूर बुंदेली और अवधी फगुआ गीत भी जरूर पढ़ें, जिनमें आपको बुंदेलखंड और अवध की माटी की असली महक मिलेगी।
होली का यह पर्व हमें केवल बाहर से नहीं, बल्कि भीतर से भी रंगने का संदेश देता है। ब्रज के इन पवित्र भजनों को गाते समय हमें यह संकल्प भी लेना चाहिए कि हम होली में अपनी बुराइयों को कैसे जलाएं, ताकि हमारा मन भगवान की भक्ति के लिए पूरी तरह से शुद्ध और निर्मल हो सके।
1. ब्रज का सबसे लोकप्रिय फाग: "होरी खेल रहे नंदलाल, मथुरा की कुंज गलीन में"
वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर से लेकर गोकुल की गलियों तक, यह फाग गीत सबसे ज्यादा उत्साह के साथ गाया जाता है। इस भजन में कान्हा और गोपियों के बीच की उस मीठी छेड़छाड़ का वर्णन है, जहाँ गुलाल उड़ाते हुए पूरा ब्रज मंडल एक ही रंग में रंग जाता है। हारमोनियम और मंजीरे की थाप पर इसे समूह में गाने का आनंद ही कुछ और है। यहाँ इस पारंपरिक भजन के पूरे लिखित बोल दिए गए हैं:
होरी खेल रहे नंदलाल, मथुरा की कुंज गलीन में।
मथुरा की कुंज गलीन में, गोकुल की कुंज गलीन में॥
होरी खेल रहे नंदलाल, मथुरा की कुंज गलीन में...उड़त गुलाल लाल भये बदरा,
और मच गयो भारी बवाल।
मथुरा की कुंज गलीन में...
होरी खेल रहे नंदलाल...इत से आई राधा गोरी,
उत से आए नंदलाल।
मथुरा की कुंज गलीन में...
होरी खेल रहे नंदलाल...भर-भर मारे रंग पिचकारी,
और कर दियो लाल गुलाल।
मथुरा की कुंज गलीन में...
होरी खेल रहे नंदलाल...ग्वाल बाल सब सखा संग में,
गावत फाग धमाल।
मथुरा की कुंज गलीन में...
होरी खेल रहे नंदलाल...
इस भजन को गाते हुए 'जय श्री कृष्णा' और 'राधे-राधे' के जयकारे लगाए जाते हैं। ब्रज की होली में भक्ति का रंग इतना गहरा होता है कि लोग अपनी सुध-बुध खो बैठते हैं। यह त्योहार हमें सिखाता है कि जीवन में प्रेम और भाईचारा सबसे ऊपर है। सही मायनों में इस त्योहार का आध्यात्मिक लाभ उठाने के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि होली में क्या करना चाहिए और किन पवित्र नियमों का पालन करना चाहिए।
2. बरसाने की लठमार होली का खास फाग: "फाग खेलन बरसाने आए हैं नटवर नंद किशोर"
मथुरा और वृंदावन के बाद ब्रज की सबसे मशहूर होली 'बरसाने' की होती है, जिसे लठमार होली कहा जाता है। बरसाने की होली में जब राधा रानी की सखियां (हुरियारिनें) नंदगांव के हुरियारों पर लाठियां बरसाती हैं, तो यह नजारा देखने लायक होता है। इसी दौरान ढाल से अपना बचाव करते हुए नंदगांव के हुरियारे जो रसिया और फाग गाते हैं, उसमें "फाग खेलन बरसाने आए हैं" सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। अगर आप ब्रज के असली लोक संगीत का आनंद लेना चाहते हैं, तो इस फाग को अपने गायन का हिस्सा जरूर बनाएं। इसके पूरे बोल यहाँ दिए गए हैं:
फाग खेलन बरसाने आए हैं नटवर नंद किशोर।
नटवर नंद किशोर, कदम की छैयां रे रसिया॥
फाग खेलन बरसाने आए हैं नटवर नंद किशोर...घेर लई सब सखियन ने, और कर दियो भारी शोर।
घेर लई सब सखियन ने, और कर दियो भारी शोर।
कदम की छैयां रे रसिया...
फाग खेलन बरसाने आए हैं...कोरी-कोरी मटकी में रंग जो घोरयो,
मारत पिचकारी की जोर।
कदम की छैयां रे रसिया...
फाग खेलन बरसाने आए हैं...राधा रानी हँस-हँस गावें,
नाचे मन का मोर।
कदम की छैयां रे रसिया...
फाग खेलन बरसाने आए हैं...
इस फाग को गाते समय बीच-बीच में तालियां और ढपली की तेज आवाज माहौल को पूरी तरह कृष्णमय कर देती है। ब्रज के इन भजनों में जो निश्छल प्रेम और समर्पण झलकता है, वह हमें सच्ची भक्ति का मार्ग दिखाता है। जब हम भगवान की भक्ति में लीन होते हैं, तो होलिका और प्रह्लाद का वह प्रसंग याद आता है जब भगवान ने अपने भक्त की रक्षा के लिए अवतार लिया था। आप भी होली में भक्त प्रह्लाद की इन 5 बातों को पढ़कर यह जान सकते हैं कि जीवन में चाहे जैसी भी परिस्थितियां हों, ईश्वर पर विश्वास कभी नहीं टूटना चाहिए।
3. गोपियों की मीठी तकरार का भजन: "रंग मत डारे रे सांवरिया, मेरी भीग गई चूनर सारी"
ब्रज फाग की श्रृंखला में यह तीसरा भजन सबसे मधुर और भावपूर्ण है। इसमें एक गोपी भगवान श्री कृष्ण से रंग न डालने की विनती कर रही है, क्योंकि उसकी चूनर खराब हो जाएगी और उसे घर वालों से ताने सुनने पड़ेंगे। यह भजन भारत के लगभग हर मंदिर और घर में फाल्गुन के दौरान बहुत ही सुरीली आवाज में गाया जाता है। आप इसे हारमोनियम या ढोलक की हल्की थाप पर गा सकते हैं। इसके लिखित लिरिक्स यहाँ नोट करें:
रंग मत डारे रे सांवरिया, मेरी भीग गई चूनर सारी।
भीग गई चूनर सारी, हो भीग गई चूनर सारी॥
रंग मत डारे रे सांवरिया...सास लड़ेगी मेरी, ननद लड़ेगी,
देगी ताना दुनिया सारी।
रंग मत डारे रे सांवरिया...कहाँ से लाऊं मैं रेशम चूनर,
कहाँ से लाऊं मैं किनारी।
रंग मत डारे रे सांवरिया...सूरदास प्रभु तुम्हरे दरस को,
मैं तो जाऊं बलिहारी।
रंग मत डारे रे सांवरिया...
यह भजन गाते हुए अक्सर लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं। ब्रज की होली में टेसू के फूलों से बने प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल होता है, लेकिन आजकल बाजार में पक्के और रासायनिक रंग मिलने लगे हैं, जो त्वचा के लिए नुकसानदायक होते हैं। अगर आप भी जमकर होली खेलने के शौकीन हैं और रंग छुड़ाने से परेशान रहते हैं, तो त्योहार से पहले ही होली का जिद्दी रंग कैसे साफ करें, इसके घरेलू और आसान उपाय जरूर पढ़ लें ताकि आपकी स्किन सुरक्षित रहे।
निष्कर्ष
होली का असली आनंद ब्रज के इन राधा-कृष्ण फाग गीतों और भजनों में ही छिपा है। जब आप अपने परिवार, दोस्तों और कीर्तन मंडली के साथ बैठकर इन भजनों को गाएंगे, तो आपको महसूस होगा कि आप अपने घर में नहीं, बल्कि वृंदावन की गलियों में बैठे हैं। हमारी लोक-संस्कृति और इन पारंपरिक गीतों को जीवित रखना हम सभी का कर्तव्य है, इसलिए इन्हें अपनी अगली पीढ़ी को जरूर सिखाएं।
होली के दिन जब आप अपनों के साथ ये फाग गाकर फारिग हों, तो उन रिश्तेदारों और दोस्तों को भी याद करें जो आपसे मीलों दूर हैं। आज के डिजिटल युग में दूरियों का कोई मतलब नहीं रह गया है। आप उन्हें प्यार भरे संदेश और होली के खूबसूरत मोबाइल वॉलपेपर और स्टेटस भेजकर इस पावन पर्व की बधाई दे सकते हैं।
नोट: ऊपर दिए गए सभी भजन और फाग गीत इंटरनेट और विभिन्न पारंपरिक स्रोतों से कलेक्ट किए गए हैं।
